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मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) के सुनहरे १०० साल

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क्या अपने कभी सोचा है की युद्ध के मैदान में जब एक फौजी घायल होता है, तो सबसे पहले उसकी देखभाल कौन करता है? किसके हाथों से उसे नई ज़िंदगी मिलती है? कौन है वो शक्ति जो सिर्फ़ घायल फौजियों का दर्द कम करती है, बल्कि उनके परिवारों का भी सहारा बनती है?

हमारे फौजी भाई समझ गए होंगे की हम मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) की बात कर रहें है। 1926 से लेकर आजतक, इन महिला अधिकारीयों ने भारतीय सेना के हेल्थ केयर सिस्टम की बैकबोन बनकर काम किया है। इस साल MNS अपनी 100वीं वर्षगांठ (Centenary Year 2025-26) मना रही है। इस अवसर का औफिशिअल स्लोगन है: "Honouring the past, Healing the present & Inspiring the Future" यानि भूतकाल का सम्मान, वर्तमानकाल का उपचार और भविष्यकाल को प्रेरित करना। 

MNS क्या है?

Logo of military nursing services

Source

1 अक्टूबर 1926 को परमानेंट नर्सिंग सर्विस भारतीय सेना में स्थापित हुई और इसे इंडियन मिलिट्री नर्सिंग सर्विस का नाम दिया गया। मिलिट्री नर्सिंग सर्विस भारतीय सेना की एक ऐसी सेवा है जो केवल महिलाओं को भर्ती करती है। इनकी मुख्य जिम्मेदारी फौजियों, उनके परिवारों और सेवानिवृत्त कर्मियों की हेल्थकेयर प्रदान करना है। यह सेवा अब आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसिस (AFMS) का हिस्सा है।

MNS ऑफिसर्स को शुरू में लेफ्टिनेंट के रैंक पर शार्ट सर्विस कमिशन दी जाती है। समय के साथ कार्य और वैकंसी के आधार परपरमानेंट कमीशन का ऑप्शन भी मिलता है।

इतिहास और विकास

MNS की जड़ें ब्रिटिश काल में हैं:

  • १८८८ में ब्रिटिश नर्सेस की मुंबई में आने के साथ इंडियन आर्मी नर्सिंग सर्विसेज की नींव रखी गई।
     
  • १९२६ में इंडियन मिलिट्री नर्सिंग सर्विस  (IMNS) का फॉर्मल इस्टैब्लिशमेंट हुआ।
     
  • १९४३ में इसे परमानेंटली इंडियन आर्मी का हिस्सा बनाया गया और ऑफिसर्स  को कमीशंड  रैंक  दिया गया। इन officers ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध में घायल सैनिकों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एम.एन.एस. (MNS) से कैसे जुड़ें?

एलीजिबिलिटी

ऐसी महिलाएं जिनके पास बी.एस.सी. (B.Sc.), पोस्ट बेसिक बी.एस.सी. (Post Basic B.Sc.), या एम.एस.सी. (M.Sc.) नर्सिंग, डिग्री होतीं हैं MNS में एलिजिबल होतीं है। 

नीट (NEET) स्कोर

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (यू.जी.) के स्कोर्स कंसिडर किए जाते हैं।

सिलेक्शन प्रोसेस

शॉर्टलिस्टेड कैंडिडेट्स का पर्सनल इंटरव्यूऔर मेडिकल एग्ज़ाम होता है।

कमिशनिंग

सफल कैंडिडेट्स को शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत लेफ्टिनेंट का रैंक दिया जाता है।

भूमिका और मिशन

A real-life image of MNS Officers marching in the Republic Day, 2024 parade.

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MNS ऑफिसर्स का मिशन है: “Excellence in patient care both in war and peace” यानि युद्ध और शांति दोनों ही समय में रोगी देखभाल में उत्कृष्टता।

MNS वे मिलिट्री हॉस्पिटल्स में काम करती हैं, चाहे वॉर ज़ोन हो या पीस टाइम।

इंटरनेशनल पीसकीपिंग मिशन्स में भी MNS ऑफिसर्स सर्व करती हैं, जैसे कॉंगो, सूडान और लेबनॉन में।

करियर और लाभ

करियर पाथ (Career Path):

ऑफिसर्स विभिन्न मिलिट्री हॉस्पिटल्स में सर्व करतीहैं और समय केसाथ हायर रैंक्स मेंप्रोमोशन पाती हैं। परमानेंटकमिशन भी परफॉरमेंस औरवैकैंसीज़ पर आधारित है।

रिकग्निशन (Recognition):

एम.एन.एस. ऑफिसर्स को उनके एक्ज़ेम्प्लरी सर्विस के लिए अवॉर्ड्स मिलते हैं, जैसे:

  • नेशनल फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवॉर्ड
  • सरोजिनी खोसला नाइटिंगेल अवॉर्ड्स

कम्पेटिटिव सैलरी, हाउसिंग और फूड अलाउंसेज़, हेल्थकेयर और रिटायरमेंट बेनिफिट्स उपलब्ध हैं।

MNS आर्म्ड फोर्सेज़ की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित-विमेन सर्विसेज़ में से एक है। देशभर के मिलिट्री हॉस्पिटल्स में पाँच हज़ार से अधिक ऑफिसर्स पोस्टेड हैं।

आज १ अक्टूबर, इंडियन मिलिट्री नर्सिंग डे के अवसर पर, FaujiBeats इन बहादुर और समर्पित सर्विंग और रिटायर्ड ऑफिसर्स  को सल्यूट करता है।

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