कुछ रिश्ते होते हैं जो शब्दों से परे होते हैं, जो सिर्फ अपनापन नहीं, बल्कि जीवन भर का साथ और सुरक्षा का अहसास देते हैं। उनमें से एक रिश्ता होता है भाई-बहन का। भाई की डगर चाहे कितनी भी दूर क्यों न हो, बहन की खुशी और उसकी मुस्कान हमेशा उसके दिल के सबसे करीब रहती है। ऐसे ही रिश्तों की मिठास को हर साल भाई दूज पर खास अंदाज में महसूस किया जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है उन बहादुर फौजियों के बारे में, जो अपने घरों और परिवारों से दूर रहते हुए भी इस रिश्ते की अहमियत महसूस करते हैं? अपने भाई-बहन के साथ त्योहार मनाने की चाह रखते हुए भी, वे सीमाओं पर, कठिन हालातों में देश की रक्षा करते हैं। यही वजह है कि फौजी भाई-बहनों के लिए भाई दूज जैसे त्यौहार केवल एक दिन नहीं बल्कि भावनाओं का प्रतीक है, जो समर्पण और कर्तव्य से बंधा है।
इसी भावना का जीता-जागता उदाहरण हाल ही में हिमाचल प्रदेश में देखने को मिला।
आपने अपने हाल ही में सोशल मीडिया पर यह पोस्ट देखा होगा, एक ऐसी कहानी जोन केवल दिल को छू जाती है, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्यार और फौजी भाईचारे की मिसाल भी पेश करती है।
भारतीय सेना के 19 ग्रेनेडियर्स के सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश से हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले तक का लंबा सफर तय किया, ताकि वे अपने बहादुर साथी अशिष कुमार की बहन आराधना के जीवन में भाई का स्थान निभा सकें।
ग्रेनेडियर अशिष कुमार (25), जो सिरमौर जिले के पौंटा साहिब तहसील के शिवा पंचायत के भरली गांव के रहने वाले थे, ने 27 अगस्त 2024 को ‘ऑपरेशन अलर्ट’ के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। अशिष के पीछे उनकी माँ, दो भाई और बहन आराधना (पूजा) हैं।
आराधना के इस खास दिन पर उसके भाई की अनुपस्थिति महसूस न हो, इसके लिए अशिष के साथी फौजी वहां पहुंचकर उसे भावनात्मक सहारा दिया। वे उस दिन उसके भाई की तरह खड़े रहे यह सिर्फ एक पारंपरिक कर्तव्य नहीं, बल्कि सेना में भाईचारे का एक सजीव प्रती कथा, जो जीवन के आगेभी कायम रहता है।
3 अक्टूबर 2025 को हुई शादी के समारोह में सैनिकों ने पारंपरिक ‘चुनरी’ उठाकर आराधना को मंच तक पहुँचाया और वर माला में उसका साथ दिया। 19वीं बटालियन ने उसे 3 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉज़िट के रूप में विवाह उपहार दिया, जबकि स्थानीय सेवानिवृत्त सैनिक संगठन ने शगुन और स्मृति चिन्ह के साथ अपनी आशीर्वाद भेजी।
उन साथी फौजियों ने न केवल भाई के कर्तव्य निभाए, बल्कि दुल्हन को उसके नए घर तक सुरक्षित पहुँचाया, यह सुनिश्चित करते हुए कि हर रिवाज सम्मान और प्यार के साथ पूरा हो।
फौजी भाइयों ने कहा “उनके (आराधना के) भाई की अंतिम इच्छा उसकी शादी थी।” यह शब्द जितने साधारण लगते हैं, उतने ही गहरे भावनाओंसे भरे हैं। यह दिखाता है कि एक फौजी अपने अंतिम पलों में भी केवल अपने परिवार के बारे में ही सोचता है।
ऐसी कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि हमारे सैनिक सिर्फ सीमाओं की रक्षा नहीं करते, बल्कि प्यार, कर्तव्य और सम्मान की ऐसी विरासत छोड़ते हैं जो हमेशा प्रेरित करती है।
इस भाई दूज FaujiBeats नमन करता है हमारे फौजी भाई-बहनों और उनके परिवारों को, जो अपने बलिदान, प्रेम और कर्तव्य के लिए हमेशा हमारे लिए मिसाल बने रहते हैं।
भाई दूज की ढेरों शुभकामनाएँ!
जय हिंद!
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