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नए साल का तोहफा, सेना ने 250+ veterans की आँखों की रोशनी लौटाई

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भारतीय सेना की पहल से 250+ वेटरन्स को मिली रोशनी और राहत|

सोचिए, एक ऐसा तोहफा जो veterans की ज़िंदगी में रोशनी और नई उम्मीद लाए। भारतीय सेना के डॉक्टरों ने देहरादून में तीन दिन के mega operation के दौरान यही कर दिखाया। इस पहल में 250 से ज़्यादा वेटरन्स की आँखों की रोशनी वापस लाई गई। यह सब हुआ लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह के प्रस्ताव और लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर के निर्देश पर, ताकि हिमालय के दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले वेटरन्स को मदद मिल सके।

नए साल का तोहफा जो दिल छू गया

25 से 27 दिसंबर के बीच हुए इस mega operation को भारतीय सेना की Central Command और Uttarakhand Sub Area के तहत अंजाम दिया गया। डॉक्टरों की टीम नई दिल्ली के Research and Referral (RR) Hospital, लखनऊ के Command Hospital और Military Hospital Dehradun से आई थी। ऑपरेशन के लिए सेना ने phacoemulsification machine, operating microscope, और premium intraocular lenses जैसे एडवांस उपकरणों को सड़क मार्ग से देहरादून तक पहुंचाया।

दूर-दराज़ के वेटरन्स की ज़िंदगी में बदलाव

उत्तराखंड के गवर्नर और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने हिमालय के इलाकों में रहने वाले वेटरन्स और उनके परिवार की समस्याओं को समझा। उन्होंने veterans की दृष्टि संबंधी परेशानियों को हल करने के लिए इस कैंप का सुझाव COAS उपेंद्र द्विवेदी को दिया। DGMS (Army) लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर ने इस विचार को तुरंत अमलीजामा पहनाने का निर्देश दिया।
“हमारा मकसद था कि ज़्यादा से ज़्यादा veterans तक यह सुविधा पहुंचे, क्योंकि वे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में काफी परेशानियों का सामना कर रहे थे,” ब्रिगेडियर संजय मिश्रा (सेना मेडल, दो बार) ने कहा, जो RR Hospital में नेत्र रोग विभाग के प्रमुख हैं।

उन्नत तकनीक और अनुभवी टीम का कमाल

इस ऑपरेशन में करीब ₹1.5 करोड़ का खर्च आया, जिसमें multi-focus, monofocal, toric, और EDOF lenses का उपयोग किया गया। सर्जिकल टीम में ब्रिगेडियर संजय मिश्रा, लेफ्टिनेंट कर्नल रवि चौहान, लेफ्टिनेंट कर्नल ईशान अग्रवाल, लेफ्टिनेंट कर्नल गगनदीप कौर, मेजर अमृता जोशी और मेजर ज्योति श्योराण शामिल थे।
“हमने 90 साल से ऊपर के मरीजों के लिए भी सर्जरी की, और चूंकि वे दूरदराज़ के इलाकों में रहते थे, हमें एकदम सटीक और त्रुटिहीन काम करना था। इसके लिए हमने सबसे एडवांस उपकरणों का इस्तेमाल किया,” एक अधिकारी ने बताया।

850 से ज़्यादा लोगों को मिला राहत का एहसास

सिर्फ कैटरेक्ट सर्जरी ही नहीं, इस कैंप में glaucoma के लिए minimally invasive surgery, intravitreal injections, और dry eyes जैसी समस्याओं का भी इलाज किया गया। कुल मिलाकर 850 से ज़्यादा मरीजों को चिकित्सा सहायता दी गई।

नई शुरुआत, नई रोशनी

यह ऑपरेशन veterans और उनके परिवारों के लिए एक नई शुरुआत है। सेना के डॉक्टरों ने सिर्फ उनकी आँखों की रोशनी नहीं लौटाई, बल्कि उनकी ज़िंदगी में एक नई उम्मीद भी जगाई। यह भारतीय सेना की प्रतिबद्धता और उनकी चिकित्सा सेवा का शानदार उदाहरण है।

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