14 अगस्त आते ही पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और सैन्य प्रतिष्ठानों में तिरंगा फहराने की तैयारियाँ होने लगती हैं। जगह-जगह देशभक्ति के गीत गूंजने लगते हैं और हर भारतीय 15 अगस्त को गर्व के साथ आज़ादी का जश्न मनाने का इंतजार करता है। लेकिन यह दिन लेकिन उत्सव मानाने के साथ साथ, बल्कि उन वीरों को याद करने का भी है जिन्होंने भारत को आज़ाद कराने के लिए अपना सब कुछ देश पर न्योछावर कर दिया।
इस संघर्ष में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी आज़ाद हिन्द फौज (INA) का योगदान भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आज़ाद हिन्द फौज ने ब्रिटिश शासन को चुनौती देने के साथ-साथ देशवासियों के मन में आज़ादी की नई उम्मीद जगाई। कई इतिहासकारों का मानना है कि भारत की आज़ादी कई आंदोलनों, क्रांतिकारियों और सैन्य प्रयासों का परिणाम थी, जिसमें आज़ाद हिन्द फौज की भूमिका भी एक अहम कड़ी रही।
आज़ाद हिन्द फौज (Indian National Army - INA) भारत की आज़ादी के लिए बनी एक सेना थी। इसका उद्देश्य केवल एक था, ब्रिटिश शासन को खत्म कर भारत को आज़ाद कराना।
इसकी शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कैप्टन मोहन सिंह ने की थी। बाद में वर्ष 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इसकी कमान संभाली। उनके नेतृत्व में आज़ाद हिन्द फौज को नई पहचान और नई ताकत मिली।
नेताजी ने सैनिकों और देशवासियों को "जय हिन्द" और "दिल्ली चलो" का नारा दिया। इन नारों ने देशभर में आज़ादी की नई उम्मीद और जोश भर दिया। आज भी "जय हिन्द" पूरे भारत का सबसे सम्मानित अभिवादन माना जाता है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिन्द फौज पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई। बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक, व्यापारी, डॉक्टर, इंजीनियर और दक्षिण-पूर्व एशिया में रहने वाले भारतीय इस आंदोलन से जुड़ने लगे।
इसी दौरान महिलाओं के लिए रानी झाँसी रेजिमेंट बनाई गई। इसकी कमान डॉ. लक्ष्मी स्वामीनाथन (बाद में कैप्टन लक्ष्मी सहगल) के हाथों में थी। यह उस समय की दुनिया की शुरुआती महिला सैन्य इकाइयों में से एक थी और इसने यह साबित किया कि देश की आज़ादी की लड़ाई में महिलाएं भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी थीं।
साल 1944 में आज़ाद हिन्द फौज ने जापानी सेना के साथ मिलकर भारत की सीमा की ओर बढ़ना शुरू किया। इसी दौरान मणिपुर के मोइरांग में पहली बार भारतीय तिरंगा फहराया गया। इसे INA की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
हालांकि इम्फाल और कोहिमा के युद्ध में खराब मौसम, हथियारों और रसद की कमी तथा जापानी सेना की हार के कारण INA को पीछे हटना पड़ा।
भले ही यह सैन्य अभियान सफल नहीं हुआ, लेकिन इसका भारतीय जनता पर गहरा असर पड़ा। लोगों में आज़ादी की भावना और मजबूत हुई और ब्रिटिश शासन को यह एहसास होने लगा कि भारत में हालात बदल रहे हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने आज़ाद हिन्द फौज के अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का फैसला किया।
नवंबर 1945 में दिल्ली के लाल किले में कर्नल शाहनवाज़ खान, कर्नल प्रेम सहगल और कर्नल गुरबख्श सिंह ढिल्लों पर मुकदमा शुरू हुआ।
ब्रिटिश सरकार को लगा था कि इन मुकदमों से INA की छवि खराब होगी, लेकिन हुआ इसका बिल्कुल उल्टा।
देशभर में लाखों लोग इन अधिकारियों के समर्थन में सड़कों पर उतर आए। अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोगों ने मिलकर उनका समर्थन किया। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने भी उनकी कानूनी मदद की। रेड फोर्ट ट्रायल ने पूरे देश को एकजुट कर दिया और आज़ादी की लड़ाई को नई ताकत मिली।
कई इतिहासकार मानते हैं कि आज़ाद हिन्द फौज की सबसे बड़ी जीत युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में थी।
ब्रिटिश सरकार भारत पर शासन करने के लिए भारतीय सेना की वफादारी पर निर्भर थी। लेकिन INA के बनने और रेड फोर्ट ट्रायल के बाद यह सवाल उठने लगा कि अगर भारतीय सैनिक ही अंग्रेजों का साथ छोड़ दें, तो ब्रिटिश शासन कितने दिन टिक पाएगा।
इसके बाद 1946 में रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह और सेना व वायुसेना के कुछ हिस्सों में भी असंतोष देखने को मिला। कई शोधकर्ताओं का मानना है कि इन घटनाओं ने ब्रिटेन को यह समझा दिया कि भारत पर लंबे समय तक शासन करना अब आसान नहीं है।
इस सवाल का जवाब नहीं है।
भारत की आज़ादी किसी एक व्यक्ति या एक आंदोलन की वजह से नहीं मिली। इसके पीछे कई कारण थे।
महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले जन आंदोलन, भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों का बलिदान, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिन्द फौज का संघर्ष, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की कमजोर आर्थिक स्थिति और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात—इन सभी ने मिलकर भारत की आज़ादी का रास्ता तैयार किया।
हालांकि इतिहासकार यह भी मानते हैं कि आज़ाद हिन्द फौज ने ब्रिटिश शासन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया और भारतीय सैनिकों में राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज़ाद हिन्द फौज केवल एक सेना नहीं थी, बल्कि देशभक्ति, साहस और त्याग का प्रतीक थी।
आज भी "जय हिन्द" पूरे देश का सम्मानित अभिवादन है और "दिल्ली चलो" का नारा भारत के स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है।
स्वतंत्रता दिवस पर आज़ाद हिन्द फौज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद करना इसलिए जरूरी है क्योंकि उन्होंने लाखों भारतीयों के मन में आज़ादी का विश्वास जगाया। उनका संघर्ष हमें यह भी सिखाता है कि भारत की आज़ादी कई महान नेताओं, सैनिकों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम थी।
भारत की आज़ादी का इतिहास कई वीरों के साहस और बलिदान से लिखा गया है। आज़ाद हिन्द फौज ने इस इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भले ही उसे युद्ध के मैदान में अंतिम सफलता नहीं मिली, लेकिन उसने भारतीयों में राष्ट्रभक्ति की नई भावना जगाई और ब्रिटिश शासन के आत्मविश्वास को चुनौती दी।
इस स्वतंत्रता दिवस, जब हम तिरंगे को सलाम करें, तब नेताजी सुभाष चंद्र बोस, आज़ाद हिन्द फौज और उन सभी वीरों को भी याद करें, जिन्होंने भारत को आज़ाद देखने का सपना देखा और उसके लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।
जय हिन्द!
आज़ाद हिन्द फौज की शुरुआत कैप्टन मोहन सिंह ने की थी। बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इसकी कमान संभाली और इसे नई दिशा दी।
नेताजी ने वर्ष 1943 में आज़ाद हिन्द फौज का नेतृत्व संभाला।
इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन को समाप्त कर भारत को स्वतंत्र कराना था।
1945 में लाल किले में INA अधिकारियों पर चले मुकदमों ने पूरे देश में आज़ादी की भावना को और मजबूत किया। इन मुकदमों ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ जनसमर्थन बढ़ाया।
भारत की आज़ादी कई कारणों का परिणाम थी। आज़ाद हिन्द फौज ने इस संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन इसके साथ महात्मा गांधी के आंदोलन, क्रांतिकारियों के बलिदान, द्वितीय विश्व युद्ध की परिस्थितियों और अन्य कई कारणों का भी योगदान था।
"जय हिन्द" को नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिन्द फौज ने पूरे देश में लोकप्रिय बनाया। आज यह भारत का एक सम्मानित राष्ट्रीय अभिवादन है.
स्रोत: यह लेख The Forgotten Army (Peter Ward Fay), United Service Institution (USI) Journal, रक्षा मंत्रालय के ऐतिहासिक अभिलेख, ब्रिटिश लाइब्रेरी के दस्तावेज़ और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अन्य ऐतिहासिक शोधों पर आधारित है।
Special Days
Special Days
Special Days