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भारतीय नौसैनिक कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला और INS Khukri की कहानी

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Indian Navy सिर्फ जहाज़, ताकत या तकनीक तक सीमित नहीं है। यह उनके लिए है जो कर्तव्य, साहस और बलिदान के लिए समर्पित हैं। नौसेना दिवस (जो 4th December को है) से पहले, हम आपको कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला और उनके जहाज़ INS Khukri की कहानी सुनाते हैं; एक ऐसी कहानी जिसने भारतीय नौसेना की वीरता को अमर कर दिया।

09 दिसंबर 1971: वह रात जिसने  इतिहास बदल दिया

Indian-Pakistan युद्ध अपने चरम पर था और समुद्र में हमारी INS खुखरी (Khukri) दुश्मन की पनडुब्बी को ढूँढने के मिशन पर थी। लेकिन तभी पाकिस्तान की पनडुब्बी PNS Hangor ने खुखरी पर टॉरपीडो (पानी के नीचे चलने वाला एक विस्फोटक) दाग दिया। कुछ ही मिनटों में जहाज़ जोर से हिला, अंधेरा छा गया और INS Khukri धीरे-धीरे समुद्र की गहराई में डूबने लगी। Reports के अनुसार उस रात 18 अधिकारी और 176 बहादुर नाविक शहीद हो गए, और उनके साथ कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला भी।

कौन थे कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला?

कैप्टन मुल्ला का जन्म 15 मई 1926 को गोरखपुर में हुआ था। उन्होंने 1948 में भारतीय नौसेना में कमीशन लिया और कई महत्वपूर्ण पदों और जहाज़ों पर सेवा दी। 1971 में वह INS Khukri के कमांडिंग ऑफिसर थे। कैप्टन मुल्ला शांत, संयमित और अपने जवानों के लिए हमेशा खड़े रहने वाले अधिकारी थे। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण हमेशा अपने लोगों की सुरक्षा थी।

A person in a military uniform

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INS Khukri का आख़िरी मिशन

INS Khukri उस समय नए सोनार सिस्टम की टेस्टिंग कर रही थी, इसलिए उसकी रफ्तार धीमी थी। यह उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई। जब दूसरा टॉरपीडो लगा, जहाज़ झुक गया। बिजली चली गई, अफरा-तफरी मच गई, और कई लोग घायल हो गए। लेकिन इस भीषण स्थिति में भी कैप्टन मुल्ला पूरी तरह शांत रहे।

नाविक आज भी याद करते हैं कि कैप्टन मुल्ला अपने कमांड चेयर पर बैठे थे, मौत के सामने भी निडर। उन्होंने ज़ोर से आदेश दिया, “Abandon Ship!” और अपने जवानों को लाइफ-बोट की ओर धकेलते हुए कहा, जाओ… अपनी जान बचाओ। एक नाविक ने उन्हें जीवन रक्षा जैकेट देने की कोशिश की। कैप्टन मुस्कुराए और बोले, तुम जाओ… मेरी चिंता मत  करो। उनका अंतिम निर्णय साफ था कि एक कप्तान अपने जहाज़ को नहीं छोड़ता। और फिर, INS Khukri डूब गई और उसका कप्तान उसके साथ।

एक परंपराजिसे अमर कर दिया गया

नौसेना की परंपरा कहती है कि कप्तान जहाज़ सबसे अंत में छोड़ता है। कैप्टन मुल्लाने इसे सिर्फ निभाया नहीं, उन्होंने इसमें अपनी जान डालकर इसे अमर कर दिया। उनकी बहादुरी और त्याग के लिए उन्हें शहीदी उपरांत महावीर चक्र (MVC) से सम्मानित किया गया।

Khukri आज भी जीवित है

दमनदीव के पास, समुद्र की गहराई में INS Khukri आज भी शांत पड़ी है। 1999 में उनके सम्मान में एक सुंदर स्मारक बनाया गया। वहां खड़े होकर ऐसा लगता है कि समुद्री हवा भी कहती है, बलसाहसजोश और  दम; Khukri नहीं किसी से कम।

FaujiBeats salute करता है कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला और भारतीय नौसेना के उन वीरों को, जिन्होंने देश के लिए जीवन दिया और मुश्किल से मुश्किल युद्धों में देश की नाव को सुरक्षित रखा।

हम आपसे कल मिलेंगे एक नए article के साथ!

जय हिन्द!



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