ज़रा सोचिए एक फौजी जब देश की सेवा के लिए वर्दी पहनता है, तो उसके पीछे पूरा परिवार भी उस यात्रा में शामिल हो जाता है। माँ का आशीर्वाद, पिता का गर्व, पत्नी की चिंता और बच्चों की उम्मीद सब कुछ जुड़ जाती हैं उस एक सलामी के साथ।
लेकिन जब वह जवान मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देता है, तब उसके परिवार के लिए सबसे बड़ा सहारा होता है देश और सरकार का साथ। इसी भावना को मज़बूती देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में शहीद सैनिकों और उनके परिजनों के हित में कई अहम घोषणाएँ की हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार ने मुठभेड़, युद्धया सैन्य अभियान में वीर गति को प्राप्त सैनिकों के परिजनों के लिए एक्स-ग्रेशिया राशि ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी है।
यह राशि केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक संदेश है कि राष्ट्र अपने रक्षकों के परिवारों के साथ हमेशा खड़ा है। यह मदद उस कठिन समय में परिवार को थोड़ा संबल देती है जब भावनात्मक और आर्थिक दोनों चुनौतियाँ सामने होती हैं।
परमवीर चक्र जैसे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को अब ₹40 लाख के बजाय ₹1 करोड़ की राशि दी जाएगी।
यह फैसला सिर्फ़ पुरस्कार नहीं, बल्कि सम्मान का प्रतीक है। यह दिखाता है कि देश की बहादुरी केवल शब्दों में नहीं, बल्कि वास्तविक सहयोग में भी झलकनी चाहिए।
जो सैनिक युद्ध या सैन्य कार्रवाई में घायल होते हैं, उनके लिए आर्थिक सहायता को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख कर दिया गया है।
सेवा के दौरान घायल हुए सैनिकों को आगे के जीवन में कई शारीरिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह राशि उनके पुनर्वास, इलाज और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
सैनिकों के माता-पिता को दिया जाने वाला वार्षिक प्रेरणा अनुदान अब ₹5,000 से बढ़ाकर ₹20,000 कर दिया गया है।
कई बार सैनिकों के पीछे उनके माता-पिता ही सबसे बड़े प्रेरणास्रोत होते हैं। यह अनुदान उनके त्याग और योगदान का छोटा लेकिन सच्चा सम्मान है।
अब सैनिकों, पूर्व सैनिकों और विधवाओं को पहली बार मकान या ज़मीन खरीदने पर ₹25 लाख तक की स्टाम्प ड्यूटी छूट मिलेगी।
घर का सपना हर परिवार का होता है। स्टाम्प ड्यूटी में छूट से सैनिक परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा और उन्हें अपने घर की नींव मज़बूत करने में मदद मिलेगी।
जब कोई फौजी राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करता है, तो उसका परिवार भी उतना ही त्याग करता है। कहीं न कहीं ऐसी योजनाएं उसी त्याग का सम्मान हैं।
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जय हिन्द!


