आज का युद्ध सिर्फ टैंकों, मिसाइलों और लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक युद्ध में टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बन चुकी है।
अब दुश्मन को हराने के लिए सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि उसकी कम्युनिकेशन, रडार और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क को भी निशाना बनाया जाता है। इसी तकनीक को Electronic Warfare System यानी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली कहा जाता है।
हाल ही में भारत सरकार ने भारतीय सेना के लिए BEL के साथ ₹1,476 करोड़ का Ground Based Mobile Electronic System (GBMES) कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इसके बाद Electronic Warfare System फिर चर्चा में आ गया है।
लेकिन आखिर यह सिस्टम क्या होता है, कैसे काम करता है और युद्ध में इसकी क्या भूमिका होती है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
Electronic Warfare System (EWS) ऐसी सैन्य तकनीक है जो दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स को पहचानने, ट्रैक करने, जाम करने और कमजोर करने का काम करती है।
सरल शब्दों में कहें तो यह सिस्टम युद्ध के दौरान दुश्मन के रडार, कम्युनिकेशन नेटवर्क, मिसाइल गाइडेंस और इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स को प्रभावित करता है।
आधुनिक युद्ध में जो देश इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम पर ज्यादा नियंत्रण रखता है, उसे रणनीतिक बढ़त मिलती है।
Electronic Warfare System मुख्य रूप से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम (Electromagnetic Spectrum) पर काम करता है।
यह सिस्टम विभिन्न प्रकार के रेडियो, रडार और कम्युनिकेशन सिग्नल्स को स्कैन करता है और फिर उनका विश्लेषण करता है।
इसके जरिए सेना:
Electronic Warfare को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा जाता है।
यह सिस्टम दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स को पहचानने और उनकी जानकारी जुटाने का काम करता है।
इससे सेना को यह पता चलता है कि दुश्मन का रडार कहां एक्टिव है और कौन सा सिस्टम इस्तेमाल हो रहा है।
इसका काम दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स को बाधित करना होता है।
उदाहरण के लिए:
यह तकनीक अपने इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स को दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक हमलों से बचाने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
आज के समय में लगभग हर सैन्य प्लेटफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स पर निर्भर है।
फाइटर जेट, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और युद्धपोत सभी रडार और कम्युनिकेशन नेटवर्क के जरिए काम करते हैं।
अगर किसी देश का इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क कमजोर पड़ जाए, तो उसकी सैन्य ताकत भी प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से Electronic Warfare आधुनिक युद्ध का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
भारत ने हाल ही में जिस GBMES यानी Ground Based Mobile Electronic System को खरीदा है, वह एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम है।
इसे Defence Electronics Research Laboratory (DLRL), हैदराबाद ने विकसित किया है और Bharat Electronics Limited (BEL) इसका निर्माण कर रही है।
यह सिस्टम:
GBMES भारतीय सेना की Situational Awareness और Air Defence क्षमता को काफी मजबूत करेगा।
भारत की सीमाएं चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से लगती हैं, जहां हाई-टेक सैन्य तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में भारतीय सेना के लिए मजबूत Electronic Warfare Capability बेहद जरूरी हो गई है।
ड्रोन युद्ध, साइबर अटैक और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसे खतरे भविष्य के युद्धों में और बढ़ सकते हैं। इसलिए भारत लगातार स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों पर निवेश कर रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रहेगा।
भविष्य का युद्ध इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल डोमेन में भी लड़ा जाएगा।
जो देश दुश्मन की कम्युनिकेशन और रडार प्रणाली को पहले निष्क्रिय कर देगा, उसे युद्ध में बड़ी बढ़त मिल सकती है।
इसी कारण दुनिया की बड़ी सेनाएं अब Electronic Warfare Systems पर तेजी से निवेश कर रही हैं।
Electronic Warfare System आधुनिक युद्ध का ऐसा हथियार बन चुका है जो बिना गोली चलाए दुश्मन की सैन्य क्षमता को कमजोर कर सकता है।
भारत भी अब तेजी से स्वदेशी Electronic Warfare टेक्नोलॉजी विकसित कर रहा है। BEL और DLRL द्वारा तैयार GBMES सिस्टम इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आने वाले वर्षों में Electronic Warfare भारतीय सेना की रणनीति और सुरक्षा का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाला है।
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जय हिन्द!
यह एक सैन्य तकनीक है जो दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, रडार और कम्युनिकेशन नेटवर्क को पहचानने, ट्रैक करने और बाधित करने का काम करती है।
GBMES यानी Ground Based Mobile Electronic System एक स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम है जिसे भारतीय सेना के लिए विकसित किया गया है।
आधुनिक युद्ध में रडार, GPS और कम्युनिकेशन सिस्टम्स बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। Electronic Warfare इन सिस्टम्स को नियंत्रित करने में मदद करता है।
हां, भारत BEL और DLRL जैसी संस्थाओं के जरिए कई आधुनिक Electronic Warfare Systems विकसित कर रहा है।
जब दुश्मन के रडार या कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम या बाधित किया जाता है, उसे Electronic Attack कहा जाता है।


