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Fauji Inbox से निकली कुछ Letters की अनसुनी कहानियाँ

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क्या आपने letters को बोलते हुए सुना है?

हाल ही में एक letter के लिए India Post ने share किया और लिखा - isn’t it amazing how an old letter can still speak? (क्या यह कमाल नहीं कि एक पुराना letter भी आज बोलता हुआ सा महसूस होता है?)

हम बात कर रहे हैं ex-Army officer Captain Dharmveer Singh के letter की, जिन्होंने Instagram पर अपने training days का एक handwritten love letter share किया। कमाल की बात यह है की इस चिट्ठी ने सिर्फ nostalgia ही नहीं जगाया, बल्कि social media पर भी धूम मचा दी। Instagram पर इसे अब तक 1.4 million views और हज़ारों comments मिल चुके हैं।

A screenshot of a book

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यह तो सिर्फ एक किस्सा हुआ, पर letters सिर्फ मिलने भर की चीज़ नहीं, soldiers ने भी अपने परिवारों को ऐसी अनमोल चिट्ठियाँ लिखी हैं जो आज भी दिलों को छू लेती हैं। ऐसा ही एक पत्र है Lieutenant Vijyant “Robin” Thapar का।

एक ऐसा Last Letter, जो अमर हो गया

जैसे border पर तैनात जवानों को घर से आने आने वाले letters उम्मीद और अपनापन देती हैं, वैसे ही faujis के द्वारा लिखे गए letters भी उनकी families के लिए अनमोल यादगार बन जाते हैं। ऐसा ही एक letter आज भी लोगों के दिलों को छू जाता है; Lieutenant Vijyant “Robin” Thapar का last letter जो उन्होंने #KargilWar के दौरान अपने परिवार को लिखा था।

उसमें उन्होंने लिखा:
“By the time you get this letter, I will be observing you all from the sky… I have no regrets; even if I become a human again, I will join the Army and fight for my nation.”

कुछ ही दिनों बाद, मात्र 22 साल की उम्र में Capt Vijyant Drass की icy heights पर लड़ते हुए शहीद हो गए। उनकी unit, Rajputana Rifles, ने Tololing और Barbad Bunker जैसी positions पर जीत दर्ज की थी। 28 जून 1999 को Alpha Company का नेतृत्व करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। देश के लिए इस बलिदान के लिए उन्हें Vir Chakra और Captain का rank दिया गया। 

Capt Vijyant का आखिरी letter केवल शब्द नहीं, बल्कि एक वसीयत थी। उसमें उन्होंने लिखा था, “Please come and see where the Indian Army fought for your tomorrow.”

अपने बेटे के letter में लिखी उस आखिरी इच्छा को पूरा करने के लिए उनके पिता Colonel Vijendra Thapar (retd.) आज भी हर साल 16,000 ft की ऊँचाई तक चढ़ाई करते हैं। 77 साल की उम्र में भी उनका यह संकल्प इस बात का सबूत है कि letters केवल emotions नहीं, बल्कि अमर प्रेरणा होते हैं। Capt Vijyant की चिट्ठी सिर्फ एक farewell note नहीं, बल्कि उस भावना की मिसाल है जिसमें एक fauji अपनी जान से भी ज़्यादा देश को importance देता है। 

आज जब हम letters के ज़रिये ऐसी कहानियों को पढ़ते हैं, तो यह सिर्फ nostalgia नहीं जगातीं, बल्कि हमें यह एहसास कराती हैं कि एक Fauji के लिए हर letter उसकी ताक़त ही नहीं, अपनों के लिए एक motivation भी होता है।

क्या आपके लिए भी training days या posting के दौरान मिले किसी letter की याद आज भी ताज़ा है? या क्या आपके पास भी ऐसी कोई चिट्ठी है, जो सालों बाद भी आपके लिए motivation बनी हुई है?

अपनी राय हमें लिखके भेजे alert@faujiebeats.com पर।

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