14 अप्रैल 1944 भारतीय इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण दिन है। यह वही दिन था जब पहली बार ब्रिटिश शासन के दौरान किसी भारतीय क्षेत्र को स्वतंत्र किया गया और वहां भारतीय तिरंगा फहराया गया।
यह घटना केवल एक झंडा फहराने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह भारत की आज़ादी की लड़ाई में एक बड़ा मोड़ साबित हुई।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आज़ाद हिंद फौज (Indian National Army) ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ा।
इसी अभियान के तहत, कर्नल शौकत अली मलिक ने अपनी टुकड़ी के साथ मणिपुर के मोइरांग में प्रवेश किया।
13 अप्रैल 1944 को भीषण लड़ाई के बाद ब्रिटिश सेना की 17वीं डिवीजन को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।
इसके ठीक अगले दिन, 14 अप्रैल 1944 को शाम 5 बजे, मोइरांग में आज़ाद हिंद सरकार का प्रशासन स्थापित किया गया और भारतीय तिरंगा फहराया गया।
मoirang और उसके आसपास का लगभग 18,000 वर्ग मील क्षेत्र आज़ाद हिंद फौज के नियंत्रण में आ गया था। यह क्षेत्र आज के कुवैत देश के आकार के बराबर माना जाता है।
यह पहली बार था जब भारतीय भूमि पर स्वतंत्र रूप से भारतीय झंडा फहराया गया।
कर्नल शौकत अली मलिक ने 15 जुलाई 1944 तक इस क्षेत्र में एक अस्थायी नागरिक प्रशासन चलाया।
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उनके जोशीले भाषणों से प्रभावित होकर हजारों स्थानीय लोग आज़ाद हिंद फौज में शामिल हो गए।
मोइरांग में दिए गए अपने भाषण में कर्नल मलिक ने कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य दिल्ली पहुंचकर लाल किले पर तिरंगा फहराना है।
उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि भारत की आज़ादी अब दूर नहीं है और इस लड़ाई में जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है।
आज़ाद हिंद फौज की स्थापना 1942 में हुई थी।
नेताजी के नेतृत्व में यह सेना भारत की आज़ादी के लिए एक शक्तिशाली सैन्य ताकत बन गई।
मोइरांग की यह जीत इम्फाल अभियान का हिस्सा थी, जिसमें जापानी सेना और आज़ाद हिंद फौज ने मिलकर ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
हालांकि बाद में ब्रिटिश सेना के कड़े जवाबी हमले के कारण आज़ाद हिंद फौज को पीछे हटना पड़ा, लेकिन यह जीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक प्रेरणादायक अध्याय बन गई।
आज भी 14 अप्रैल को मोइरांग में INA Flag Hoisting Day के रूप में याद किया जाता है।
मोइरांग में आज इस ऐतिहासिक घटना की याद में स्मारक बनाया गया है।
यह स्थान आज़ाद हिंद फौज के बलिदान और साहस का प्रतीक है।
हाल के वर्षों में यहां एक विशाल तिरंगा भी स्थापित किया गया है, जो उत्तर-पूर्व भारत के सबसे ऊंचे झंडों में से एक है।
14 अप्रैल 1944 केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की उस भावना का प्रतीक है जिसमें सैनिकों और आम नागरिकों ने मिलकर आज़ादी का सपना देखा और उसके लिए संघर्ष किया।
कर्नल शौकत अली मलिक और आज़ाद हिंद फौज के वीर सैनिकों का यह योगदान हमेशा देश के इतिहास में अमर रहेगा।
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जय हिंद!
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