Paris 2024 Paralympic Games में भारत ने अपने Paralympic इतिहास की सबसे बड़ी सफलता दर्ज की। भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 29 मेडल्स (7 गोल्ड, 9 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज) जीतकर देश का नाम रौशन किया। ये जीत भारत की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय पहचान और खेलों में हो रहे विकास का प्रमाण है। Paris Paralympics न केवल भारत की सफलता को दर्शाते हैं, बल्कि Paralympic movement के विकास का भी प्रतीक हैं।
Paralympic Games की शुरुआत 29 जुलाई 1948 को Dr. Ludwig Guttmann द्वारा Stoke Mandeville Games के रूप में हुई थी। इस event में सिर्फ 16 injured servicemen और women ने हिस्सा लिया था, पर इसी ने wheelchair athletes के लिए एक मंच तैयार किया। Rome में 1960 में पहले official Games का आयोजन हुआ, जिसमें 23 देशों के 400 athletes ने हिस्सा लिया। तब से Summer और Winter Paralympics का आयोजन हर 4 साल में किया जाता है, जिसमें International Paralympic Committee (IPC) और International Olympic Committee (IOC) के बीच समझौते के अनुसार ये Games उन्हीं शहरों में होते हैं जहाँ Olympics होते हैं।
भारत ने पहली बार 1968 में Tel Aviv, Israel में Paralympics में भाग लिया। भारत की ओर से 10 athletes ने हिस्सा लिया, लेकिन मेडल्स जीतने में सफलता नहीं मिली। हालांकि, ये भारत के para-athletes के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण कदम था। 1972 Heidelberg Games में Para-swimmer Murlikant Petkar ने 50m freestyle swimming में गोल्ड जीतकर भारत को पहली बार मेडल दिलाया और विश्व रिकॉर्ड भी बनाया। उसके बाद कई बार भारत ने Games में भाग नहीं लिया, लेकिन 1984 में वापसी की और 4 मेडल्स जीते। इसके बाद Devendra Jhajharia ने 2004 Athens Games में गोल्ड जीता और भारत के लिए नए अध्याय की शुरुआत की।

2012 से 2020 का समय भारत के लिए एक परिवर्तनकारी समय रहा। इस दौरान भारतीय athletes ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और दुनिया भर में पहचान बनाई। 2012 London Paralympics में Girisha N Gowda ने हाई जंप में सिल्वर जीता। फिर 2016 Rio Games में 4 मेडल्स के साथ भारत का प्रदर्शन और बेहतर हुआ। Mariyappan Thangavelu ने हाई जंप में गोल्ड जीता और Devendra Jhajharia ने एक और गोल्ड जीतकर अपनी उपलब्धियों को बढ़ाया। 2020 Tokyo Paralympics में भारत ने 19 मेडल्स (5 गोल्ड, 8 सिल्वर, 6 ब्रॉन्ज) जीते, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था।

2024 Paris Paralympics में भारत ने अपने अब तक के सबसे अच्छे प्रदर्शन के साथ 29 मेडल्स (7 गोल्ड, 9 सिल्वर, 13 ब्रॉन्ज) जीते। यह भारत के para-athletes की मेहनत और समर्पण का परिणाम था। Avani Lekhara ने Women's 10m Air Rifle में गोल्ड जीता, Nitesh Kumar ने badminton में Men's Singles SL3 में गोल्ड हासिल किया, और Sumit Antil ने Men's Javelin Throw F64 में जीत हासिल की। इस Games में भारत का 18th स्थान रहा, जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

इन उपलब्धियों के बीच, कुछ athletes की कहानियाँ विशेष रूप से प्रेरणादायक हैं जो Armed Forces से जुड़े backgrounds से आते हैं। Simran Sharma, जो Naik Gajender Singh की पत्नी हैं, खुद एक सफल athlete होने के साथ-साथ अपने पति की coach भी हैं। उनके समर्पण और सामूहिक प्रयासों ने उन्हें Paris 2024 में महत्वपूर्ण सफलता दिलाई।
Dipesh Kumar, एक Army personal के बेटे हैं जिन्होंने 24 साल देश की सेवा की। Dipesh अपने पिता को अपना role model मानते हैं, और उन्हीं की प्रेरणा से वह अपने खेल में शीर्ष पर पहुँचे।
इसके अलावा, Gold Medal विजेता Nitesh, Ex CHELR Vijender Singh (Navy) 1/88 बैच के बेटे हैं। Nitesh ने 2010 में अपनी 10th बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले एक ट्रेन हादसे में अपना पैर खो दिया था।
2024 Paris Paralympics भारत के Paralympic सफर में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह न केवल अब तक की सबसे बड़ी सफलता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे हमारे para-athletes अपनी मेहनत और संकल्प से नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। Khelo India और TOPS जैसी सरकारी योजनाओं ने इन athletes को एक मजबूत मंच दिया है, जिससे वे आगे भी देश का नाम रौशन कर सकें।
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Reference from PIB used in this article


