भारतीय सेना दिवस हर वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सैन्य इतिहास का एक निर्णायक क्षण दर्शाता है। इसी दिन, वर्ष 1949 में, फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने भारतीय सेना के पहले भारतीय सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला और सेना की कमान पूरी तरह भारतीय नेतृत्व में आई।
वर्ष 2026 में भारत 78वां भारतीय सेना दिवस मना रहा है। यह अवसर केवल अतीत को स्मरण करने का नहीं, बल्कि यह दिखाने का भी है कि भारतीय सेना आज एक आधुनिक, तकनीक-सक्षम और वैश्विक स्तर पर सम्मानित बल बन चुकी है।
भारतीय सेना दिवस उस परिवर्तन का प्रतीक है, जब सेना एक औपनिवेशिक ढांचे से निकलकर एक राष्ट्रीय, पेशेवर और संवैधानिक संस्था बनी। विभाजन के बाद की चुनौतियाँ, 1947-48 का युद्ध और सीमाओं की सुरक्षा — इन सभी के बीच फील्ड मार्शल करियप्पा का नेतृत्व सेना के लिए मार्गदर्शक बना।
उनकी सोच ने सेना को अनुशासन, धर्मनिरपेक्षता और राजनीतिक निष्पक्षता के मूल्यों पर आधारित किया।
28 जनवरी 1899 को कूर्ग (वर्तमान कर्नाटक) में जन्मे के.एम. करियप्पा को 1919 में सेना में कमीशन मिला। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बर्मा और मध्य पूर्व जैसे कठिन मोर्चों पर सेवा दी और पहली बार किसी भारतीय अधिकारी को युद्ध इकाई की कमान सौंपी गई।
स्वतंत्रता के बाद उनके प्रमुख योगदानों में शामिल हैं:
स्वतंत्रता के बाद भारतीय सेना ने 1947-48, 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) जैसे प्रमुख युद्धों में देश की रक्षा की। इसके साथ ही सेना ने आतंकवाद-रोधी अभियानों, आपदा राहत और अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है, जहाँ 6,000 से अधिक भारतीय सैनिक सेवा दे रहे हैं।
1776 में कोलकाता में स्थापित भारतीय सेना की विरासत ढाई शताब्दियों से अधिक पुरानी है। प्रथम विश्व युद्ध में 13 लाख से अधिक भारतीय सैनिकों ने विदेशी मोर्चों पर सेवा दी, जिनमें से 74,000 से अधिक शहीद हुए। उनकी स्मृति में इंडिया गेट आज भी खड़ा है।
शांति काल में भी सेना सेवा का प्रतीक है। ऑपरेशन राहत (2013) के दौरान उत्तराखंड बाढ़ में 10,500 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकालना इसका उदाहरण है।
भारतीय सेना का सफर औपनिवेशिक दौर से लेकर आधुनिक नेटवर्क-आधारित युद्ध क्षमता तक पहुँचा है। गोरखा योद्धाओं से लेकर कॉम्बैट डॉग्स और ड्रोन यूनिट्स तक, सेना परंपरा और तकनीक का संतुलन हर दिन दिखाती है।
भारतीय सेना दिवस 2026 हमें यह याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि कर्तव्य, अनुशासन और बलिदान से सुनिश्चित होती है।
जय हिंद।
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