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भारतीय सेना की रेजिमेंट्स सिर्फ यूनिट नहीं, एक परंपरा हैं

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यदि आप फ़ौज से जुड़े हैं, तो यह बात किसी परिचय की मोहताज नहीं कि एक फ़ौजी की पहचान उसकी रैंक से पहले उसकी रेजिमेंट से होती है। पोस्टिंग बदल सकती है, यूनिट बदल सकती है, लेकिन रेजिमेंट हमेशा साथ रहती है।

फिर भी, बहुत से आम लोग और युवा जो सेना में जाने का सपना देखते हैं, यह पूरी तरह नहीं समझ पाते कि रेजिमेंट क्या होती है और सेना में इसका इतना महत्व क्यों है?

भारतीय सेना दिवस से पहले, आइए आसान भाषा में भारतीय सेना की रेजिमेंट प्रणाली को समझें — जाने उसका इतिहास, उसका महत्व और वे रेजिमेंटें जिन्होंने पीढ़ियों से देश की रक्षा की है।

भारतीय सेना में रेजिमेंट क्या होती है?

भारतीय सेना की रेजिमेंट एक पारंपरिक सैन्य संरचना होती है, जो मुख्य रूप से पैदल सैनिकों यानी इन्फैंट्री और अन्य लड़ाकू इकाइयों से जुड़ी होती है। इसकी जड़ें ब्रिटिश काल तक जाती हैं, जब अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और युद्ध कौशल के आधार पर सैन्य इकाइयाँ बनाई गई थीं।

समय के साथ, इन रेजिमेंट्स ने अपनी अलग पहचान बनाई, जिनमें शामिल हैं:

  • अपनी विशिष्ट युद्ध पुकार (war cry)
     
  • रेजिमेंटल चिन्ह (insignia) 
     
  • रीति-रिवाज और परंपराएँ 
     
  • और गहरा फ़ौजी भाईचारा

आज भी रेजिमेंट्स भारतीय सेना की भावनात्मक और सांस्कृतिक नींव बनी हुई हैं।

रेजिमेंट सिस्टम का महत्व क्यों है?

एक फ़ौजी के लिए उसकी रेजिमेंट सिर्फ एक सैन्य इकाई नहीं, बल्कि उसका परिवार होती है।

रेजिमेंट प्रणाली:

  • सैनिकों के बीच आजीवन रिश्ते बनाती है
     
  • युद्ध के समय भरोसा और एकजुटता बढ़ाती है
     
  • परंपराओं और इतिहास को जीवित रखती है
     
  • कठिन परिस्थितियों में मनोबल को मजबूत करती है

भलेही किसी रेजिमेंट केअलग-अलग बटालियन देशके विभिन्न हिस्सों में तैनात हों, रेजिमेंटल पहचान हर जवान कोएक सूत्र में बांधे रखतीहै।

भारतीय सेना में रेजिमेंट्स के प्रकार

भारतीय सेना में विभिन्न प्रकार की रेजिमेंट्स होती हैं, जिनकी अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ होती हैं:

  • इन्फैंट्री (Infantry) – सीमाओं की रक्षा और दुश्मन से सीधी लड़ाई
     
  • आर्मर्ड कोर (Armed Corps) – टैंकों के साथ आक्रामक और रक्षात्मक अभियान
     
  • आर्टिलरी (Artillery) – तोपों, रॉकेट और मिसाइलों से युद्ध समर्थन
     
  • इंजीनियर्स (Engineers) – पुल निर्माण, मार्ग खोलना और बाधाएँ हटाना
     
  • एयर डिफेंस (Air Defence) – हवाई खतरों से सुरक्षा
     
  • स्पेशल फोर्सेज़ (Special forces) – विशेष और गुप्त सैन्य अभियान
     
  • सिग्नल्स (Signals)– सुरक्षित सैन्य संचार व्यवस्था
     
  • मेडिकल कोर (Medical Corps) – सैनिकों की चिकित्सा और देखभाल

भारतीय सेना में कितनी रेजिमेंट्स हैं?

वर्तमान समय में भारतीय सेना में 27 प्रमुख रेजिमेंट्स हैं, जिनमें इन्फैंट्री, विशेष इकाइयाँ और स्काउट्स शामिल हैं।

प्रमुख रेजिमेंट्स की युद्ध पुकार और  पहचान

  • ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स की स्थापना वर्ष 1948 में हुई थी और इसका रेजिमेंटल सेंटर महाराष्ट्र के कामठी में स्थित है। इसका आदर्श वाक्य “पहला हमेशा पहला” है, जबकि इसकी युद्ध पुकार “गरुड़ का हूँ बोल प्यारे” है।
     
  • मद्रास रेजिमेंट, जो भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट्स में से एक है, वर्ष 1758 से सक्रिय है।इसका रेजिमेंटल सेंटर तमिलनाडु के वेलिंगटन में है। इसका आदर्श वाक्य“स्वधर्मे निधनं श्रेयः” है, जिसका अर्थ है कर्तव्य निभाते हुए मृत्यु, गौरव की बात है। इसकी युद्ध पुकार “वीर मद्रासी,  अडी कोल्लू, अडी कोल्लू” है।
     
  • राजपूताना राइफल्स की स्थापना 1775 में हुई और इसका केंद्र दिल्ली कैंटोनमेंट में है। इसका आदर्श वाक्य “वीर भोग्या वसुंधरा”  है और युद्धपुकार “राजा रामचंद्र की जय” है।
     
  • सेहरावत रेजिमेंट, वर्ष 1778 से सक्रिय है और हरियाणा में स्थित है।इसका आदर्श वाक्य “सर्वत्र विजय” तथा युद्ध पुकार“बोल बजरंग  बली की जय” है।
     
  • डोगरा रेजिमेंट, 1877 में गठित हुई और इसका केंद्र उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद में है। इसका आदर्श वाक्य“कर्तव्यम् अन्वात्मा” है और युद्ध पुकार “ज्वाला माता की जय” है।
     
  • सिख रेजिमेंट, 1846 से सक्रिय है और झारखंड के रामगढ़ कैंट में स्थित है। इसका आदर्श वाक्य“निश्चय कर अपनी जीत करों” है। इसकी युद्धपुकार “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” और “वाहे गुरु जी दा खालसा, वाहे  गुरु जी दी फ़तेह” है।
     
  • जाट रेजिमेंट, 1795 में स्थापित हुई और हरियाणा व बरेली में स्थित है।इसका आदर्श वाक्य “संगठन व वीरता” है और युद्धपुकार “जाट बलवान, जय भगवान” है।
     
  • पैराशूट रेजिमेंट, 1945 में बनी और इसका केंद्र बेंगलुरु में है। इसका आदर्श वाक्य “शत्रुजीत” और युद्ध पुकार“बलिदान परम धर्म” है।
     
  • पंजाब रेजिमेंट, 1757 से सक्रिय है और रामगढ़ कैंट में स्थित है। इसका आदर्श वाक्य “स्थल व जल” तथा युद्ध पुकार“जो बोले सो निहाल,  सत श्री अकाल” और “बोल ज्वाला मां की जय” है।
     
  • ग्रेनेडियर्स, 1778 में गठित हुई और इसका केंद्र जबलपुर में है। इसका आदर्श वाक्य और युद्ध पुकार दोनों “सर्वदा शक्तिशाली” हैं।
     
  • सिख लाइट इन्फैंट्री, 1944 से सक्रिय है और फ़तेहगढ़ में स्थित है।इसका आदर्श वाक्य “देग तेग फ़तेह” और युद्ध पुकार “जो बोले  सो निहाल, श्री अकाल” है।
     
  • मराठा लाइट इन्फैंट्री, 1768 में बनी और बेलगाम में स्थित है। इसका आदर्श वाक्य “कर्तव्य, सम्मान, साहस” है और युद्ध पुकार “बोल श्री  छत्रपति शिवाजी महाराज की जय, टेमलाई माता की जय” है।
     
  • गढ़वाल राइफल्स, 1887 से सक्रिय है और लैंसडाउन में स्थित है। इसका आदर्शवाक्य “युद्धाय कृत निश्चय” और युद्ध पुकार “बद्री  विशाल लाल की जय” है।
     
  • कुमाऊँ रेजिमेंट, 1813 में गठित हुई और रानीखेत में स्थित है। इसका आदर्श वाक्य “पराक्रमो विजयते” है और इसकी युद्ध पुकारों में “कालिका  माता की जय,” “बजरंग बली की जय,” और “दादा किशन की जय” शामिल हैं।
     
  • असम रेजिमेंट, 1941 में बनी और शिलॉन्ग में स्थित है। इसका आदर्श वाक्य “असम विक्रम” और युद्ध पुकार“राइनो चार्ज” है।
     
  • बिहार रेजिमेंट, 1941 से सक्रिय है और दानापुर में स्थित है। इसका आदर्श वाक्य “वीरता से युद्ध पर” तथा युद्ध पुकार“बजरंग बली की  जय” और “बिरसा मुंडा की जय” है।
     
  • महार रेजिमेंट, 1941 में बनी और सागर में स्थित है। इसका आदर्शवाक्य “यश सिद्धि” और युद्ध पुकार“बोलो हिंदुस्तान की जय” है।
     
  • जम्मू और कश्मीर राइफल्स, 1821 से सक्रिय है और जबलपुर में स्थित है। इसका आदर्श वाक्य “प्रशस्त रणवीरता” और युद्ध पुकार“दुर्गा माता  की जय” है।
     
  • जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री, 1947 में गठित हुई और अवंती पोरा में स्थित है। इसका आदर्श वाक्य “बलिदानं वीर लक्षणम्” और युद्ध पुकार“भारत माता की जय” है।
     
  • नागा रेजिमेंट, 1970 में बनी और रानीखेत में स्थित है। इसका आदर्शवाक्य “पराक्रमो विजयते” और युद्ध पुकार “जय दुर्गा नागा” है।
     
  • गोरखा रेजिमेंट्स (1, 3, 4, 5, 8, 9 और 11 गोरखा राइफल्स) वर्ष 1815 से 1918 के बीच गठित हुईं। इन सभी का साझा आदर्श वाक्य “कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो” है और प्रसिद्ध युद्ध पुकार “जय माँ काली,  आयो गोरखाली” है।
     
  • लद्दाख स्काउट्स, 1963 में गठित हुई और लेह में स्थित है।इसकी युद्ध पुकार “की की सो सो ल्हारग्यालो” है।
     
  • अरुणाचल स्काउट्स, 2010 में बनी और रायंगव पासी घाट में स्थित है, जब कि सिक्किम स्काउट्स, 2013 में गठित हुई और लखनऊ में स्थित है।

इन्फैंट्री रेजिमेंट्स की भूमिका

भारतीय इन्फैंट्री सैनिक दुनिया के सबसे अधिकयुद्ध-अनुभवी और तैयार सैनिकों में गिने जाते हैं। इन्फैंट्री रेजिमेंट्स:

  • दुश्मन से आमने-सामने मुकाबला करती हैं
     
  • महत्वपूर्ण इलाकों की रक्षा करती हैं
     
  • पहाड़, रेगिस्तान, जंगल और बर्फीले क्षेत्रों में तैनात रहती हैं

हालाँकि इन्हें रेजिमेंट कहा जाता है, लेकिन इनके बटालियन अलग-अलग ब्रिगेड, डिवीजन और कोर में तैनात रहते हैं, जहाँ भी देश को उनकी ज़रूरत होती है।

एक विरासत जो आज भी जीवित है

नई हों या पुरानी, हर रेजिमेंट एक ही मूल्यों पर चलती है — कर्तव्य, सम्मान, साहस और बलिदान।

हर फ़ौजी के लिए उसकी रेजिमेंट सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उसकी पहचान होती है। युद्ध के मैदान में गूंजती युद्ध पुकार से लेकर शांति के समय का भाईचारा, रेजिमेंट भारतीय सेना की आत्मा को दर्शाती है।

इन रेजिमेंट्स को याद करना, हर उस सैनिक को नमन करना है जिसने देश की रक्षा के लिए वर्दी पहनी।

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