18 ग्रेनेडियर्स भारतीय सेना की सबसे सम्मानित Infantry Battalions में से एक है, जिसने 1999 Kargil War के दौरान टोलोलिंग, Point 4590 और टाइगर हिल जैसी रणनीतिक चोटियों को दुश्मन से वापस हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाई। Operation Vijay के दौरान इस बटालियन ने असाधारण साहस, नेतृत्व और बलिदान का परिचय दिया, जिसके लिए इसे रिकॉर्ड 52 Gallantry Awards प्राप्त हुए।
समुद्र तल से 16,000 फीट से अधिक ऊंचाई।
हड्डियां जमा देने वाली ठंड।
सांस लेना भी एक चुनौती।
और सामने दुश्मन, जो ऊंची चोटियों पर मजबूत बंकरों में बैठा था।
साल था 1999।
कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों ने द्रास, कारगिल और बटालिक सेक्टर की कई महत्वपूर्ण ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया था। इनमें सबसे महत्वपूर्ण नाम थे: टोलोलिंग और टाइगर हिल।
इन चोटियों को वापस हासिल करने की जिम्मेदारी जिन बहादुर सैनिकों के कंधों पर थी, उनमें सबसे आगे थी भारतीय सेना की एक बटालियन: 18 ग्रेनेडियर्स।
आज यह नाम सिर्फ एक यूनिट नहीं, बल्कि साहस, बलिदान और अदम्य संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
18 ग्रेनेडियर्स, भारतीय सेना की प्रतिष्ठित The Grenadiers Regiment का हिस्सा है। यह Regiment भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सम्मानित Infantry Regiments में गिनी जाती है।
ग्रेनेडियर्स का इतिहास वीरता, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में लड़ने की परंपरा से भरा हुआ है। लेकिन 1999 का कारगिल युद्ध वह अध्याय था जिसने 18 ग्रेनेडियर्स को भारतीय सैन्य इतिहास में एक विशेष स्थान दिलाया।
जब भारतीय सेना ने Operation Vijay शुरू किया, तब दुश्मन ऊंची पहाड़ियों पर बैठा हुआ था और नीचे की घाटियों पर नजर रख रहा था।
स्थिति बेहद कठिन थी।
भारतीय सैनिकों को सीधी चढ़ाई करते हुए हमला करना था।
दुश्मन के पास ऊंचाई का लाभ था।
मौसम प्रतिकूल था।
लेकिन भारतीय सेना पीछे हटने वाली नहीं थी।
18 ग्रेनेडियर्स को युद्ध के सबसे कठिन और महत्वपूर्ण मिशनों में से कुछ सौंपे गए।
कारगिल युद्ध के शुरुआती चरण में टोलोलिंग दुश्मन का मजबूत गढ़ बना हुआ था।
यह चोटी द्रास सेक्टर पर हावी थी और श्रीनगर-लेह Highway पर नजर रखती थी। जब तक टोलोलिंग दुश्मन के कब्जे में था, भारतीय सेना के लिए आगे बढ़ना बेहद कठिन था।
18 ग्रेनेडियर्स ने कई दिनों तक लगातार संघर्ष किया।
भीषण गोलाबारी हुई।
कई सैनिक घायल हुए।
कई वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।
लेकिन अंततः भारतीय सैनिकों ने दुश्मन को पीछे धकेलते हुए टोलोलिंग और Point 4590 पर कब्जा कर लिया।
यह जीत सिर्फ एक सामरिक सफलता नहीं थी।
यह वह क्षण था जिसने पूरे युद्ध का मनोबल बदल दिया।
अगर कारगिल युद्ध की किसी एक लड़ाई को सबसे प्रतीकात्मक कहा जाए, तो वह निश्चित रूप से टाइगर हिल होगी।
16,608 फीट ऊंची यह चोटी पूरे क्षेत्र पर नजर रखती थी।
दुश्मन यहां से National Highway 1A पर निगरानी रख सकता था और भारतीय सेना की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता था।
इसलिए टाइगर हिल को वापस लेना बेहद जरूरी था।
3 और 4 जुलाई 1999 की रात, 18 ग्रेनेडियर्स के सैनिकों ने एक ऐसा हमला किया जिसे आज भी भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे साहसी कार्रवाइयों में गिना जाता है।
बटालियन की Elite Ghatak Platoon को लगभग सीधी खड़ी बर्फीली चट्टानों से चढ़ाई कर दुश्मन पर हमला करने का आदेश मिला।
यह रास्ता इतना कठिन था कि दुश्मन को वहां से हमले की उम्मीद तक नहीं थी।
लेकिन भारतीय सैनिकों ने अंधेरे, बारिश और दुश्मन की गोलियों के बीच चढ़ाई जारी रखी।
सुबह होने तक टाइगर हिल पर तिरंगा लहरा रहा था।
टाइगर हिल की लड़ाई का नाम आते ही सबसे पहले याद आते हैं Yogendra Singh Yadav।
तब वह एक युवा Grenadier थे और Ghatak Platoon का हिस्सा थे।
उन्होंने स्वेच्छा से सबसे आगे चलकर रस्सियां लगाने की जिम्मेदारी ली ताकि बाकी सैनिक चढ़ाई कर सकें।
दुश्मन की भारी गोलीबारी में उनके साथी शहीद हो गए और वह स्वयं भी कई गोलियां लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
घायल अवस्था में ही आगे बढ़ते हुए उन्होंने दुश्मन के Machine Gun Bunkers पर हमला किया, कई दुश्मन सैनिकों को मार गिराया और अपने साथियों के लिए रास्ता साफ किया।
उनकी वीरता से प्रेरित होकर पूरी Platoon आगे बढ़ी और टाइगर हिल पर कब्जा करने में सफल रही।
उनके अद्वितीय साहस के लिए उन्हें भारत का सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार Param Vir Chakra प्रदान किया गया।
Rajesh Singh Adhikari टोलोलिंग की लड़ाई के सबसे प्रेरणादायक नेताओं में से एक थे।
उन्होंने आगे बढ़कर अपने सैनिकों का नेतृत्व किया और दुश्मन के मजबूत ठिकानों पर हमला करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
उनकी वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत Maha Vir Chakra से सम्मानित किया गया।
R. Vishwanathan 18 ग्रेनेडियर्स के उन बहादुर अधिकारियों में थे जिन्होंने टोलोलिंग की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गंभीर परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सैनिकों का नेतृत्व जारी रखा और राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्हें मरणोपरांत Vir Chakra से सम्मानित किया गया।
टाइगर हिल पर हमला करने वाली Ghatak Platoon का नेतृत्व Balwan Singh कर रहे थे।
उन्होंने अपने सैनिकों को लगभग असंभव समझे जाने वाले मार्ग से आगे बढ़ाया और मिशन को सफलता तक पहुंचाया।
उनकी असाधारण नेतृत्व क्षमता और साहस के लिए उन्हें Maha Vir Chakra प्रदान किया गया।
कारगिल युद्ध के दौरान 18 ग्रेनेडियर्स ने ऐसा इतिहास रचा जो आज भी भारतीय सेना में सम्मान के साथ याद किया जाता है।
इस बटालियन को एक ही ऑपरेशन में 52 Gallantry Awards प्राप्त हुए।
यह उपलब्धि भारतीय सेना की सबसे उल्लेखनीय यूनिट उपलब्धियों में गिनी जाती है। प्रमुख सम्मान प्राप्त करने वाले वीरों में शामिल थे:
कारगिल युद्ध को 25 वर्ष से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन 18 ग्रेनेडियर्स का नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है।
यह कहानी सिर्फ युद्ध जीतने की नहीं है।
यह कहानी है—
भारतीय सैन्य इतिहास में कुछ यूनिट्स ऐसी होती हैं जिनकी पहचान सिर्फ उनकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उनके बलिदानों से बनती है।
18 ग्रेनेडियर्स ऐसी ही एक बटालियन है।
टोलोलिंग की चट्टानों से लेकर टाइगर हिल की बर्फीली ऊंचाइयों तक, इस यूनिट ने साबित किया कि साहस का कोई विकल्प नहीं होता।
आज भी जब कारगिल विजय की बात होती है, तो 18 ग्रेनेडियर्स का नाम उन वीरों के साथ लिया जाता है जिन्होंने असंभव को संभव बनाकर इतिहास लिख दिया।
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जय हिन्द!
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