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Ex-Serviceman की अमेरिका जाने की कोशिश क्यों बनी सबसे बड़ी भूल?

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Mandeep Singh, एक ex-serviceman, जो अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए USA जाना चाहते थे, आज अपने सबसे कठिन अनुभव से गुज़र रहे हैं. उन्हें वादा किया गया था कि वह legal तरीके से अमेरिका पहुंचेंगे, लेकिन असलियत में उन्हें dunki route पर भेज दिया गया, जहाँ उन्होंने सांपों और मगरमच्छों से बचने की कोशिश की, भूखे रहना पड़ा, और अपनी पगड़ी और दाढ़ी तक का बलिदान देना पड़ा.

₹40 लाख गवा दिए, और बदले में सिर्फ दर्द और धोखा मिला

अमृतसर के रहने वाले 38 वर्षीय Mandeep को एक एजेंट ने ₹40 लाख में अमेरिका पहुंचाने का वादा किया था. उन्हें भरोसा दिया गया था कि एक महीने में वह legal तरीके से U.S. में होंगे.

"अगस्त 2024 में मेरी यात्रा शुरू हुई. पहले दिल्ली, फिर मुंबई, वहाँ से नैरोबी, और फिर Amsterdam होते हुए मुझे Suriname ले जाया गया. वहाँ पहुंचते ही sub-agent ने ₹20 लाख और मांगे, जो मेरे परिवार ने भारत में दिए," – Mandeep बताते हैं.

यहीं से शुरू हुआ असली संघर्ष.

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12 Canals, मगरमच्छ, सांप, और 13 दिन तक जंगल में संघर्ष

Suriname से आगे की यात्रा किसी खतरनाक परीक्षा से कम नहीं थी. "हमें भीड़भाड़ वाली गाड़ियों में बैठाकर Guyana ले जाया गया. वहाँ से Bolivia, फिर Ecuador और फिर हमें Panama के घने जंगलों में छोड़ दिया गया," – Mandeep बताते हैं.

"हमें साफ कह दिया गया कि अगर ज़्यादा सवाल पूछे, तो गोली मार दी जाएगी. 13 दिन तक हमें जानलेवा जंगल पार करना पड़ा, जहाँ 12 नहरें थीं, मगरमच्छ और सांप हर जगह थे. कुछ लोगों को सिर्फ एक डंडा दिया गया कि अगर कोई मगरमच्छ या सांप हमला करे तो खुद को बचाने की कोशिश करें," – उन्होंने अपने दर्दनाक अनुभव को साझा किया.

भूख और थकान से हालत खराब हो गई थी. "कभी आधी जली हुई रोटी मिलती थी, कभी सिर्फ noodles. 12-12 घंटे पैदल चलना पड़ता था."

आखिरकार पकड़े गए, और वापस भेज दिए गए

Panama से होते हुए, यह ग्रुप Costa Rica, Honduras, और फिर Guatemala पहुँचा. "Guatemala में हमें curd rice मिला, पर Nicaragua पार करते समय हमें कुछ भी खाने को नहीं मिला," – Mandeep कहते हैं.

जब वह Mexico के Tijuana पहुँचे, तो अमेरिका की सरहद बस कुछ कदम दूर थी. लेकिन तभी Border Patrol ने उन्हें पकड़ लिया. "हमें कुछ भी कहने का मौका नहीं मिला. हमें सीधा detention center में डाल दिया गया," – उन्होंने बताया.

"27 जनवरी की सुबह हमें जबरन बॉर्डर पार करवाया गया और फिर U.S. authorities ने हमें पकड़ लिया. हमें बस इतना कहा गया – ‘You will be deported.’"

16 फरवरी को, U.S. military aircraft 112 भारतीयों को वापस Amritsar airport लेकर आया, जिसमें Mandeep भी शामिल थे. यह इस महीने की तीसरी deportation flight थी.

अब सोचने की बात यह है –

  • क्या भारत में ex-servicemen के लिए इतनी कम opportunities हैं कि उन्हें इतना बड़ा जोखिम उठाना पड़ रहा है?
  • क्या हम अपनी savings और मेहनत के पैसे को ऐसे जोखिम में डालने से पहले एक बार और नहीं सोच सकते?
  • अगर ₹40-50 लाख खर्च करने ही हैं, तो क्या यही पैसा किसी बिज़नेस या दूसरी income opportunities में नहीं लगाया जा सकता?
  • क्या हमारे सैनिकों के लिए Resettlement Programs और Skilling Initiatives पर्याप्त हैं?
  • क्या सरकार और सेना को Ex-Servicemen के लिए बेहतर रोजगार के अवसर नहीं बनाने चाहिए?

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जय हिंद!  



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