मुझे आज भी वो दिन याद हैं जब मैं Cantonment के अंदर cycle चलाया करता था। तब हर तरफ शांति और सुकून था, कोई ऊंची-ऊंची commercial buildings नहीं हुआ करती थीं, और हर कोने में सिर्फ हरियाली और disciplined माहौल था। लेकिन अब जो नई policy आई है, उससे लगता है कि हमारे प्यारे Cantonments की तस्वीर धीरे-धीरे बदल जाएगी।
क्या अब ये सारे इलाके civilians को सौंप दिए जाएंगे? ऐसा लगता है कि धीरे-धीरे कई और Cantonments civilians के हाथों में जा सकते हैं, और वो पुरानी यादें सिर्फ हमारे दिलों में रह जाएंगी।
Modi सरकार की policy के तहत, Indian Army के दस Cantonments को civilian authorities को सौंपने की तैयारी में है। तीन Army Commands ने इस process की paperwork लगभग पूरी कर ली है। वो Cantonments जो अब urban local bodies में merge हो जाएंगी, उनमें शामिल हैं: Dehradun, Deolali, Nasirabad, Babina, Ajmer, Ramgarh, Mathura, Shahjahanpur, Clement Town, और Fatehgarh।
March में Ministry of Defence ने draft notifications जारी कर इस process की शुरुआत की थी। अब Central Command, South Western Command और Southern Command उत्तराखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश की सरकारों के साथ मिलकर इस handover process को पूरा कर रही हैं।
कई लोगों के लिए Cantonments सिर्फ एक जगह नहीं बल्कि यादों का बसेरा होते हैं। यहाँ की हरियाली, शांति, और disciplined life शायद ही किसी और जगह पर मिले। लेकिन अब सरकार की योजना 62 Cantonments को खत्म करने की है, जिन्हें "archaic colonial legacy" कहा जा रहा है।
जहाँ military areas को "Military Station" में convert किया जाएगा, वहीं civil areas local municipalities को सौंप दिए जाएंगे। Yol Cantonment (हिमाचल प्रदेश) इसका एक उदाहरण है, जिसे पिछले साल civilian authorities को सौंपा गया था।
सवाल ये है कि क्या हम अपने Cantonments की वो पुरानी पहचान खो देंगे? क्या वो हरे-भरे lung spaces और carbon sinks भी खत्म हो जाएंगे?
Cantonments का इतिहास भी खास है। ये British era में बने थे और तब से लेकर अब तक, इन्हें एक exclusive area माना गया जहाँ सिर्फ military personnel और उनके families रहती थीं। लेकिन समय के साथ, cities का विस्तार हुआ और civilians ने भी इन इलाकों के पास रहना शुरू कर दिया, जिससे कई बार friction भी हुआ।
Independence के समय देश में 56 Cantonments थे, और 1947 के बाद 6 और जोड़े गए। अब सरकार का मानना है कि municipal laws में uniformity लाने के लिए civil areas को nearby municipalities में merge कर देना चाहिए।
Cantonments सिर्फ जगहें नहीं, वो हमारी memories का हिस्सा हैं। क्या हम उन्हें बदलते देख पाएंगे? या फिर वो सिर्फ हमारी यादों का हिस्सा बनकर रह जाएंगी?
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जय हिन्द!


