Armed Forces के नियमों के अनुसार, अगर किसी personnel को service के दौरान कुछ हो जाता है, तो ex-gratia amount उनके “Next of Kin” (NOK) को दिया जाता है। जब कोई व्यक्ति armed forces में भर्ती होता है, तो उसके parents या guardians को उसके post-demise funds के beneficiary के रूप में record किया जाता है, मतलब उनका नाम 'next of kin' के रूप में लिखा जाता है। लेकिन अगर व्यक्ति की शादी हो जाती है, तो NOK record में उसके माता-पिता की जगह उसके spouse का नाम लिखा जाता है।
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लेकिन अब, Captain Anshuman के parent's media के सामने आकर “NOK” policy में बदलाव की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि Smriti Singh ने उनसे सभी रिश्ते तोड़ लिए हैं और अपने बेटे के मरणोपरांत मिलने वाले honours लेकर घर से चली गई हैं। Ravi Pratap Singh, शहीद के पिता, ने कहा कि वह अपने बेटे को मिले Kirti Chakra को हाथ भी नहीं लगा पाए जो उनके बेटे को President ने 5 जुलाई को दिया था, क्योंकि उनकी बहू award ceremony के बाद उसे ले गई।
Ravi Pratap Singh ने कहा, "Next of Kin के लिए जो criteria तय किया गया है, वह सही नहीं है। मैंने Defence Minister Rajnath Singh से भी इस बारे में बात की है। Anshuman की wife अब हमारे साथ नहीं रहती, शादी सिर्फ पांच महीने पुरानी थी, और कोई बच्चा नहीं है। हमारे पास सिर्फ एक photo है अपने बेटे की जो दीवार पे लटकी हुई है, जिसमें माला पड़ी है।"
उन्होंने आगे कहा, "इसीलिए हम चाहते हैं कि NOK की definition को स्पष्ट किया जाए। यह तय किया जाए कि अगर शहीद की पत्नी परिवार के साथ नहीं रहती, तो किस पर कितनी dependency है।"
ऐसी कई situations में, शहीद की wife armed forces join कर लेती हैं और बाद में re-marry भी कर लेती हैं। ऐसे में शहीद के माता-पिता, जिनके पास कुछ भी नहीं होता, उनका क्या होगा?
Captain Anshuman Singh के parents द्वारा Next of Kin policies पर बोलने के बाद, Commander Nishant Singh की mother, Smt. Promila Devi, ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उनका कहना है कि उन्हें कुछ भी नहीं मिला क्योंकि सारा पैसा उनकी बहू को चला गया। उन्होंने कहा कि उनकी old age में कोई उनकी देखभाल करने वाला नहीं है और उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
Promila Devi ने कहा कि brave officers के parents, जो duty के दौरान अपनी जान गंवा देते हैं, उनकी अनदेखी हो रही है। उन्होंने policies की review की भी मांग की है। उनका मानना है कि officers की widows को compensation मिलनी चाहिए, लेकिन जिन parents की पूरी dependency उनके बेटों पर होती है, उन्हें भी grants का beneficiary बनाया जाना चाहिए।
कई मामलों में families बहुत गरीब होती हैं और उनके पास essential amenities भी नहीं होतीं। बेटे की death के बाद, अगर उनकी बहू चली जाती है, तो NOK (Next of Kin) policy के अनुसार उन्हें कुछ भी नहीं मिलता और wife को सभी rights मिलते हैं।
उन्हें भी pension और अन्य financial assistance मिलनी चाहिए, साथ ही free या affordable health services मिलनी चाहिए। NOK policy में reforms कर parents को भी rights देने चाहिए ताकि शहीद सैनिकों के families को respect और support मिले|
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जय हिंद!
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