क्या आप जानते हैं? सरकारी report के अनुसार, 2025 में भारत में 17.82 लाख online fraud की शिकायतें दर्ज हुई हैं। धोखेबाज अब UPI, फर्जी websites, social media links और messages का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। बहुत से लोग एक सेकंड में किसी नकली link पर क्लिक कर देते हैं और कुछ ही मिनटों में बैंक बैलेंस खाली हो जाता है। यह खतरा हम सबके बहुत करीब है।
हाल ही में FaujiBeats के एक poll में लोगों से पूछा गया कि क्या उन्होंने या उनके किसी जानने वाले ने कभी किसी फर्जी website या link पर क्लिक करके नुकसान झेला है। कुल 64% लोगों ने कहा कि उन्हें फर्जी लिंक से धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा। यह दिखाता है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी अब आम हो गई है और एक छोटी सी गलती भी कई बार मिनटों में बड़ा आर्थिक नुकसान करा सकती है।
यहाँ तक की बैंक अकाउंट टेकओवर, क्रेडिट कार्ड स्कैम, और नकली सामान की खरीद जैसी कई घटनाएं सिर्फ एक फेक वेबसाइट के कारण शुरू होती हैं।
2024 के पहले क्वार्टर में ही 9,63,000 से अधिक यूनिक फिशिंग साइट्स मिलीं। यह सिर्फ फिशिंग साइट्स की संख्या है। असली नकली वेबसाइट्स की कुल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
फेक वेबसाइट एक ऐसी नकली साइट होती है जो किसी असली वेबसाइट जैसी दिखती है। लोगो, डिज़ाइन, URL, रंग, भाषा… सब कुछ हूबहू कॉपी किया जाता है ताकि यूज़र बिना शक के अपनी जानकारी डाल दे।
अटैकर्स इन्हें बहुत तेजी से बनाते हैं। कभी पेड ऐड्स से, कभी SMS फिशिंग से, कभी सोशल मीडिया, तो कभी SEO का इस्तेमाल करके।
एक बार आप इन साइट्स पर पहुंच गए तो आपके साथ यह हो सकता है:
• लॉगिन जानकारी चोरी
• कार्ड डेटा लीक
• मैलवेयर इंस्टॉल
• आपके नाम से गलत जानकारी फैलना
Nike, Adidas, Apple जैसी दिखने वाली नकली साइट्स।
मिलता है: घटिया प्रोडक्ट, नकली सामान या कुछ भी नहीं। साथ में कार्ड डेटा चोरी।
बैंक, ईमेल, ट्रैवल, यूनिवर्सिटी पोर्टल के फेक लॉगिन पेज। यूज़रनेम–पासवर्ड डालते ही अकाउंट खतरे में।
उच्च रिटर्न का लालच। लोग पैसे भेज देते हैं और बाद में साइट गायब।
नकली या इस्तेमाल किए हुए गिफ्ट कार्ड बेचती हैं। पैसा भी जाता है, डेटा भी।
अमेरिका में फेक न्यूज़ साइट्स की संख्या असली लोकल मीडिया से भी ज्यादा पाई गई। ये साइट्स गलत जानकारी फैलाती हैं और लोगों की राय को प्रभावित करती हैं।
amazon.com और amaz0n.com में छोटा फर्क भी बहुत बड़ा होता है।
DigiCert जैसी असली सील क्लिक करने पर खुलती है। नकली सील क्लिक नहीं होगी।
पैडलॉक गारंटी नहीं है। लेकिन HTTP (बिना S) हमेशा खतरा है।
Google Safe Browsing जैसे टूल तुरंत बता देते हैं कि URL सुरक्षित है या नहीं।
रिटर्न पॉलिसी, प्राइवेसी पॉलिसी, सही पता, स्पेलिंग और भरोसेमंद रिव्यू।
नाम, ईमेल… कुछ भी न डालें।
• डोमेन का आखिरी हिस्सा देखें google.com.cust-login.ie
असली डोमेन है: cust-login.ie
• हाइफ़न वाला डोमेन
google-search.com असली नहीं है
• नंबर वाला डोमेन
http://192.12.1.10जोखिम ज्यादा
• माउस-ओवर करके असली लिंक देखें
दिखने में कुछ और, खुलने पर कुछ और
अब स्कैमर्स:
• बड़े मीडिया ब्रांड्स की कॉपी बना रहे हैं
• SEO का इस्तेमाल कर नकली साइट्स को ऊपर ला रहे हैं
• कंटेंट फ़ार्मिंग से हजारों फेक आर्टिकल बना रहे हैं
• असली न्यूज़ को "Admin" नाम से छाप रहे हैं
एक रिपोर्ट ने 60 से ज्यादा नकली न्यूज़ साइट्स का नेटवर्क पकड़ा जो BBC, Bloomberg, CNBC और Washington Post जैसी साइट्स की नकल थीं।
• PayPal क्लोन साइट्स — paypa1.com जैसी
• Apple Support SEO स्कैम
• Netflix Billing Error स्कैम
• ChatGPT डाउनलोड मालवेयर साइट्स
• Nike World Cup Sale स्कैम
ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है, लेकिन इसके साथ Cyber Insurance जैसे नए तरीके एक security layer प्रदान करते हैं । यह insurance उन स्थितियों में मदद करता है जब आपके बैंक खाते से fraud transaction हो, आपके device या data को नुकसान पहुंचे, phishing लिंक या scam से आर्थिक नुकसान हो, या आपकी ऑनलाइन पहचान का दुरुपयोग हो। ऐसे मामलों में यह वित्तीय नुकसान की भरपाई करता है और आपके डिजिटल जीवन का एक सुरक्षित कवच बन जाता है।
ऐसी और जानकारी के लिए जुड़ेरहे FaujiBeats के साथ!
जय हिन्द!
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