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ऑपरेशन विजय: गोवा मुक्ति और पुर्तगाली शासन का अंत

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आज गोवा को अक्सर एक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है: समुद्र तट, संगीत, सुकून और छुट्टियों की पहचान। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह “चिल करने की जगह” कभी 450 वर्षों तक विदेशी औपनिवेशिक शासन के अधीन थी? 

जी हाँ गोवा भारत को सौंपा नहीं गया था, बल्कि 1961 में ऑपरेशन विजय के तहत मुक्त कराया गया था। यह अभियान केवल सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि भारत के संप्रभु अस्तित्व को पूर्ण करने और उपनिवेशवाद के अंतिम अध्याय को समाप्त करने का साहसिक निर्णय था। हर साल 19 दिसंबर को मनाया जाने वाला गोवा मुक्ति दिवस इसी ऐतिहासिक संघर्ष और विजय की याद दिलाता है।

A rea-life newspaper image from 1961

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गोवा का ऐतिहासिक परिचय पुर्तगाली  आगमन: 

वास्को डा गामा 1498 में भारत पहुँचे और 1510 में Afonso de Albuquerque ने गोवा पर कब्जा किया, इसे पुर्तगाली भारत का मुख्यालय बनाया।

पुर्तगाली शासन: 

ब्रिटिश और फ्रांसीसी के विपरीत, पुर्तगाल ने 1947 के बाद भारत में अपनी उपनिवेशी सत्ता नहीं छोड़ी। गोवा 450 साल से अधिक समय तक पुर्तगाली शासन में रहा।

गोवा का महत्व:

आर्थिक: 

मसाले और लौह अयस्क के प्रमुख निर्यात का केंद्र।

रणनीतिक: 

भारत के पश्चिमी तट पर महत्वपूर्ण समुद्री स्थिति।

सांस्कृतिक: 

गोवा की जनता ने भारतीय सांस्कृतिक पहचान बनाए रखी।

कूटनीतिक प्रयास और मुक्ति की राह

स्वतंत्रता के बाद: 

भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ, लेकिन पुर्तगाल ने गोवा, दमन और दीव सौंपने से इनकार कर दिया।

विफल कूटनीति: 

भारत ने 1950 से बातचीत शुरू की और 1953 में संबंध तोड़ दिए। 1955 में सत्याग्रही पुर्तगाली बलों से हिंसा का सामना करने पड़े।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: 

पुर्तगाल ने NATO और संयुक्त राष्ट्र का रुख किया। अमेरिका और ब्रिटेन ने पुर्तगाल का समर्थन किया, जबकि सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया।

ऑपरेशन विजय: सैन्य कार्रवाई

योजना: 

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिसंबर 1961 में सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दी। रक्षा मंत्री वी.के. कृष्ण मेनन और सेना प्रमुख पी.एन. थापर ने ऑपरेशन का समन्वय किया।

सैन्य बल:

सेना: 

30,000 सैनिक

नौसेना: 

INS Delhi, INS Mysore आदि ने पुर्तगाली सुदृढीकरण को रोका

वायुसेना: 

कैनबरा बमबाजों ने प्रमुख पुर्तगाली ठिकानों को निशाना बनाया

मुख्य लड़ाइयाँ:

उत्तर और पूर्वी मोर्चा: 

बल बेलगाम और करवार से आगे बढ़े

अगुआड़ा किला: 

पुर्तगाली प्रतिरोध टूट गया

नौसैनिक नाकेबंदी: 

पुर्तगाली फ्रिगेट NRP Afonso de Albuquerque ने आत्मसमर्पण किया

समर्पण: 

19 दिसंबर 1961 – पुर्तगाली गवर्नर जनरल मैनुअल एंटोनियो वास्सालो ई सिल्वा ने आत्मसमर्पण किया। गोवा, दमन और दीव भारत में शामिल हो गए।

परिणाम और प्रभाव

राजनीतिक: 

गोवा संघ राज्य क्षेत्र बना; 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त किया। पुर्तगाल ने 1974 तक कूटनीतिक संबंध तोड़ दिए।

आर्थिक और सांस्कृतिक: 

गोवा ने पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था अपनाई; पुर्तगाली संस्कृति, वास्तुकला और परंपरा की झलक वहाँ अभी भी पायी जाती है।

ऑपरेशन विजय केवल एक सैन्य सफलता नहीं थी, बल्कि उन वीर सैनिकों के साहस, अनुशासन और बलिदान की अमर गाथा थी जिन्होंने राष्ट्र की संप्रभुता के लिए निर्णायक भूमिका निभाई। थलसेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों ने सीमित समय में समन्वित कार्रवाई कर इतिहास की दिशा बदल दी। आज जब गोवा स्वतंत्र भारत का अभिन्न अंग है, तो यह उन बहादुरों की वजह से है जिन्होंने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। 

गोवा मुक्ति दिवस हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र की स्वतंत्रता केवल शब्दों से नहीं, बल्कि वीरता और संकल्प से सुरक्षित रहती है। 

हम ऑपरेशन विजय के सभी वीर सपूतों को नमन करते हैं।

जय हिंद!



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