कल्पना कीजिए आप सरहद से लंबी ड्यूटी पूरी करके बैरक में लौटे हैं। थकान इतनी है कि नींद तुरंत आ जानी चाहिए, लेकिन जैसे ही आँखें बंद होती हैं, दिमाग में वही पुरानी तस्वीरें घूमने लगती हैं। अचानक कोई दरवाज़ा ज़ोर से बंद होता है और दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है। दिन में सब सामान्य लगता है, लेकिन रात होते ही बेचैनी और घबराहट बढ़ जाती है।
यह सिर्फ़ एक सैनिक की कहानी नहीं, बल्कि बहुत से सेवारत (serving) और पूर्व सैनिकों (ex-servicemen) का अनुभव है। ऐसे लक्षण सिर्फ़ थकान नहीं, बल्कि Post-Traumatic Stress Disorder (PTSD) का संकेत हो सकते हैं; एक ऐसी स्थिति, जो अक्सर अनदेखी रह जाती है लेकिन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती है।
PTSD एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जो अत्यधिक तनाव, आघात या चिंताजनक अनुभवों के बाद होती है। उसमें व्यक्ति उस घटना से “बाहर आने” में कठिनाई महसूस करता है।
यह सेवा करते समय हो सकता है, ज्यादा तैनाती, कठिन ऑपरेशन, घर से दूरी; और रिटायरमेंट या कैरियर बदलने के बाद भी इसका असर हो सकता है। यानी सेवारत सैनिकों (serving) और पूर्व-सैनिकों (ex-servicemen) दोनों में PTSD हो सकता है।
नीचे वे मुख्य प्रकार दिए गए हैं, जो अक्सर सैनिकों के जीवन में तनाव का कारण बनते हैं:
सीमा पर लगातार तैनाती, अप्रत्याशित मिशन, कठिन ज्योग्राफिकल कंडीशंस (geographical conditions) और मौसम संबंधी चुनौतियाँ।
पोस्टिंग, पदोन्नति, करियर अनिश्चितता, अपेक्षाएँ और पदों का बदलाव।
घर से दूरी, पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ, बच्चों की देखभाल या माता-पिता की चिंता।
ये तनाव अलग-अलग रूप लेते हैं, लेकिन जब ये मिलकर अत्यधिक बढ़ जाएँ, तो वे PTSD की संभावना को और बढ़ा देते हैं।
नीचे कुछ सामान्य लक्षण दिए हैं, जिन पर ध्यान देना चाहिए:
यदि इनमे से कई लक्षण समय के साथ गंभीर हो जाएँ और दैनिक जीवन में बाधा डालें, तो यह चेतावनी है कि आपको ध्यान देना चाहिए।
आज की तकनीक ने भी मदद की है। निचे दिए गए दो प्रमुख ऐप (app) हमारे फौजियों और पूर्व-सैनिकों के लिए उपयोगी हैं:
SeHAT OPD (Services e-Health Assistance & Teleconsultation) एक ऑनलाइन चिकित्सा प्लेटफार्म है, जिसे रक्षामंत्रालय और अन्य संस्थाओंने मिलकर विकसित किया है। इसके माध्यम से वीडियो, ऑडियो और चैट के ज़रिए डॉक्टर से परामर्श लिया जा सकता है। यह सेवा सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए उपलब्ध है। 27 मई 2021 को रक्षा मंत्री ने इस पोर्टल का उद्घाटन किया, ताकि सीमांत और दूर-दराज़ इलाकों में रहने वाले सेवा कर्मियों को सहज स्वास्थ्य सलाह मिल सके। इस प्रणाली के तहत ई-प्रिस्क्रिप्शन (e-prescription) और रिकॉर्ड साझा करना संभव है।
SeHAT OPD एक बहुत बड़ी सुविधा है, जब अस्पताल जाना मुश्किल हो तब घर बैठे ही विशेषज्ञ से परामर्श मिलना संभव है।
सेना ने भी ऐसे ऐप विकसित किए हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायत पंजीकरण में मदद करते हैं:
भारतीय सेना ने SAI ऐप नामक एक सुरक्षित मैसेजिंग ऐप लॉन्च किया है, जिसमें एन्ड-टू-एन्ड एन्क्रिप्शन के साथ वॉयस, टेक्स्ट और वीडियो कॉलिंग की सुविधा है। यह ऐप सैनिकों के बीच सुरक्षित संवाद सुनिश्चित करता है और डिजिटल संचार की सुविधा बढ़ाता है।
ये तकनीकी पहल सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं, ताकि सैनिक मानसिक स्वास्थ्य विषयों में सहजता से पहुँच बना सकें।
PTSD कोई दुर्लभ समस्या नहीं है; यह सेवा करते समय और सेवा के बाद दोनों समय हो सकती है। तनाव कई रूप लेता है; ऑपरेशनल, पेशेवर और पारिवारिक और जब ये मिल जाएँ, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि आज सुविधा है, जैसी तकनीकी सेवाएँ और सेना द्वारा बनाए गए ऐप्स मानसिक स्वास्थ्य सहायता को सरल और सुलभ बनाते हैं।
अगर आप किसी ऐसे साथी को जानते हैं जो PTSD से जूझ रहा है, तो ये आर्टिकल उनके साथ ज़रूर शेयर करें और जागरूकता फैलाएँ।
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जय हिन्द!


