भारत में डिजिटल पेमेंट और यूपीआई यूसेज के बढ़ने के साथ क्यूआर कोड स्कैम, यूपीआई फ्रॉड, फेक पेमेंट लिंक और फास्टैग फ्रॉड के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल के महीनों में कई आर्मी ऑफिसर्स और आम सिटिज़न्स को इन ऑनलाइन पेमेंट फ्रॉड का टारगेट बनाया गया है।
साइबर क्राइम यूनिट – दिल्ली पुलिस और अलग-अलग स्टेट पुलिस डिपार्टमेंट्स ने इन क्यूआर कोड फ्रॉड और फास्टैग स्कैम को लेकर कई बार एडवाइजरी जारी की है।
क्यूआर कोड स्कैम और यूपीआई फ्रॉड आज सबसे कॉमन डिजिटल फ्रॉड मेथड बन चुके हैं। स्कैमर्स ट्रस्ट, अर्जेंसी और ऑफिशियल पहचान का मिसयूज़ करते हैं।
दिसंबर 2025 में पुणे में एक सीनियर आर्मी कर्नल को फेक ई-चालान लिंक भेजा गया। लिंक एक रियल गवर्नमेंट वेबसाइट जैसा दिख रहा था।
जैसे ही उन्होंने अपने कार्ड डिटेल्स डालीं, ₹3.81 लाख से ज्यादा अमाउंट एक इंटरनेशनल अकाउंट में ट्रांसफर हो गया।
अगर आप फास्टैग एनुअल पास खरीदने या रिन्यू करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो एक्स्ट्रा कॉशन रखें। स्कैमर्स एनएचएआई के नाम से फेक वेबसाइट बनाकर लोगों से पेमेंट ले रहे हैं।
ऐसी सिमिलर स्पेलिंग वाली वेबसाइट्स से हमेशा सावधान रहें।
क्यूआर कोड स्कैन करना मतलब मनी सेंड करना। अगर कोई कहे कि मनी रिसीव करने के लिए स्कैन करो — तुरंत मना करें।
अगर पेमेंट करते समय किसी व्यक्ति का नाम दिखे, तो ट्रांजैक्शन स्टॉप कर दें।
फेक ई-चालान, फास्टैग रिन्यूअल या केवाईसी अपडेट के नाम पर आने वाले लिंक को पहले वेरिफाई करें।
कोई भी गवर्नमेंट डिपार्टमेंट या आर्मी यूनिट फोन पर ओटीपी, पिन या सीवीवी नहीं मांगता।
फास्टैग सर्विस के लिए ऑथराइज्ड बैंक पोर्टल या ऑफिशियल हाईवे ऐप का ही इस्तेमाल करें।
अगर आप क्यूआर कोड स्कैम, यूपीआई फ्रॉड या फास्टैग फ्रॉड का शिकार हो जाएं, तो तुरंत रिपोर्ट करें:
क्यूआर कोड स्कैम, यूपीआई फ्रॉड और फास्टैग फ्रॉड यह साफ दिखाते हैं कि साइबर क्रिमिनल्स लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। डिजिटल इंडिया के इस दौर में अवेयरनेस, कॉशन और साइबर सिक्योरिटी नॉलेज ही आपकी सबसे बड़ी शील्ड है। अपनी बैंकिंग इंफॉर्मेशन को हमेशा सिक्योर रखें, सस्पिशियस लिंक से दूर रहें और किसी भी ऑनलाइन संदिघ्द गतिविधि को तुरंत रिपोर्ट करें।
FaujiBeats ऐसी ही जागरूकता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आपके लिए लाता रहेगा, इसलिए हमसे जुड़े रहें और सतर्क रहें।
जय हिन्द!
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