कल्पना कीजिए, किसी सैन्य छावनी में अचानक अनुशासनहीन स्थिति पैदा हो जाती है। सेना के कुछ जवान तुरंत स्थिति को संभालते हैं, सैनिकों और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और वातावरण को शांत करते हैं। यही काम सैन्य पुलिस (Corps of Military Police – CMP) करती है। कांगो और बर्मा में CMP के मिशनों ने दिखाया कि ये सैनिक युद्ध के मैदान में या शांति अभियानों में कितने महत्वपूर्ण हैं। हर वर्ष 18 अक्टूबर को CMP का ‘Corps Raising Day’ मनाया जाता है, जो इस बल की वीरता, समर्पण और योगदान का प्रतीक है।
भारतीय सेना की संरचना में CMP एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशिष्ट इकाई है। इसे अक्सर ‘रेड बेरेट्स’ के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इसके सभी जवान लाल बेरेट और सफेद बेल्ट पहनते हैं, जो उन्हें सेना की अन्य कोर से अलग पहचान देते हैं। CMP केवल अनुशासन बनाए रखने वाली इकाई नहीं है, बल्कि यह सेना के संचालन, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मिशनों में भी अहम भूमिका निभाती है।
CMP का इतिहास 1939 में शुरू हुआ, जब जुलाई 1939 में पहली इकाई 'Force 4 Provost Unit' के नाम से बनाई गई। यह 4th Indian Infantry Division का हिस्सा थी और इसे 7 और 11 कैवेलरी रेजिमेंट के सैनिकों से तैयार किया गया।
7 जुलाई 1942 को ब्रिटिश भारत सरकार ने औपचारिक रूप से Corps of Indian Military Police का गठन किया। स्वतंत्रता के बाद, 18 अक्टूबर 1947 को इसे ‘Corps of Military Police (CMP)’ के रूप में पुनः स्थापित किया गया। CMP का Regimental Centre बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है और इसका मोटो है: Seva Tatha Sahayata।
CMP के जवान अपने विशेष लाल बेरेट, सफेद बेल्ट और लैनियार्ड के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, वे काले ब्रासार्ड पहनते हैं, जिस पर लाल अक्षरों में ‘MP’ अंकित होता है। यह यूनिक पहचान CMP को सेना की अन्य कोर से अलग करती है।
CMP का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य सेना में कानून और अनुशासन बनाए रखना है। यह सैनिकों और अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखती है, और यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका अनुशासनात्मक कार्रवाई करती है। गंभीर मामलों में दोषियों को सैन्य या नागरिक प्राधिकरण के पास सौंपा जाता है। इसके अलावा, CMP को सैनिकों को हिरासत में लेने और गंभीर अपराधों की जांच करने का अधिकार प्राप्त है।
CMP की जिम्मेदारी में सेना के वाहनों, काफिलों और सैनिकों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करना शामिल है। यह कार्य न केवल शांति के समय आवश्यक है, बल्कि युद्ध और आपातकालीन परिस्थितियों में भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। CMP मार्गों की सुरक्षा करती है, सड़क और पुलों की जांच करती है, और सुनिश्चित करती है कि सैनिक और सामग्री सुरक्षित ढंग से अपने गंतव्य तक पहुँचें।
CMP सैन्य ठिकानों, गोला-बारूद भंडार, संचार केंद्र और प्रशिक्षण सुविधाओं की सुरक्षा करती है। ये प्रतिष्ठान सेना के संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, और CMP उन्हें जासूसी, आतंकवादी हमलों और किसी भी प्रकार के बाहरी खतरे से सुरक्षित रखती हैं।
युद्ध के समय कैद किए गए दुश्मन सैनिकों की देखभाल CMP के जिम्मे होती है। CMP सुनिश्चित करती है कि युद्धबंदी अंतरराष्ट्रीय कानून और जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार सुरक्षित और मानवीय तरीके से रखा जाए। इसके साथ ही, CMP युद्धबंदियों से सैन्य खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में भी मदद करती है।
CMP सैन्य चोरी, धोखाधड़ी, हमला और जासूसी जैसी गंभीर घटनाओं की पूरी जांच करती है। इनके प्रशिक्षित अधिकारी सबूत इकट्ठा करते हैं, रिपोर्ट तैयार करते हैं और कोर्ट-मार्शल में न्याय सुनिश्चित करते हैं। CMP कभी-कभी सिविल पुलिस के साथ भी समन्वय करती है जब सेना के किसी सदस्य का नागरिक मामलों में शामिल होना होता है।
CMP उच्च अधिकारियों और VIP की सुरक्षा में सक्रिय रहती है। किसी उच्च पदस्थ अधिकारी की यात्रा, सार्वजनिक कार्यक्रम या आतंकवादी घटना के समय, CMP सेना और नागरिक सुरक्षा बलों के साथ मिलकर आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
CMP सैन्य परेड, आधिकारिक समारोह और राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में भी भाग लेती है। इनके अनुशासन और पेशेवर कौशल से सेना की छवि और प्रतिष्ठा मजबूत होती है।
CMP के जवान कई UN शांति अभियानों में शामिल रहे हैं, जैसे कांगो, सोमालिया, रवांडा, सिएरा लियोन और वर्तमान में लेबनान (UNFIL), गोलन हाइट्स (UNDOF)। उनके योगदान से न केवल सैनिकों और शरणार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि भी मजबूत होती है।
CMP का सैन्य पुलिस बैंड 1953 में फैज़ाबाद में स्थापित हुआ। यह राष्ट्रपति भवन और अन्य औपचारिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति देता है। 1997 में दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इस बैंड ने गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान बनाया।
CMP के जवानों को PVSM, AVSM, SM, SC जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। इनके वीरता, समर्पण और अनुशासन को बार-बार सराहा गया है।
Corps Raising Day हमें याद दिलाता है कि सेना की सफलता केवल युद्ध कौशल में नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और एकजुटता में निहित है। CMP की सेवाएँ और बलिदान भारतीय सेना और देश के लिए गर्व का विषय हैं।
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