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डिजिटल फ्रॉड पर RBI के नए नियम 2026

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भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है। UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर फ्रॉड के मामले भी सामने आते रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए Third Amendment Directions 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है।

इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग लेनदेन में होने वाले फ्रॉड से ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा देना और मुआवजा व्यवस्था को स्पष्ट करना है।

किन डिजिटल ट्रांजैक्शनों पर लागू होंगे नए नियम?

RBI के ड्राफ्ट के अनुसार ये नियम 1 जुलाई 2026 के बाद किए गए डिजिटल लेनदेन पर लागू होंगे।

इनमें शामिल हैं:

  • UPI भुगतान
     
  • इंटरनेट बैंकिंग
     
  • मोबाइल बैंकिंग
     
  • डेबिट और क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन
     
  • एटीएम से निकासी

ये सभी ट्रांजैक्शन Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत आने वाले इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर की श्रेणी में आते हैं।

हालांकि ये नियम कमर्शियल बैंकों (commercial banks) पर लागू होंगे, जबकि Small Finance Banks, Payments Banks, Regional Rural Banks और Local Area Banks इससे बाहर रहेंगे।

Authorized और Fraudulent ट्रांजैक्शन में क्या फर्क होगा?

RBI ने अपने ड्राफ्ट में पहली बार स्पष्ट रूप से बताया है कि कौन-से ट्रांजैक्शन अधिकृत (Authorised) माने जाएंगे और कौन-से धोखाधड़ी (Fraudulent)।

Authorised ट्रांजैक्शन

यदि कोई ट्रांजैक्शन इन माध्यमों से किया गया है तो उसे सामान्यतः अधिकृत (authorized) माना जाएगा:

  • OTP
     
  • PIN
     
  • पासवर्ड
     
  • कार्ड डिटेल्स (CVV, Expiry Date)
     
  • बैंक द्वारा दिया गया कोई अन्य डिजिटल ऑथेंटिकेशन

इसके अलावा यदि ग्राहक ने पहले से किसी तीसरे पक्ष को standing instruction या mandate के जरिए अनुमति दी है तो उसके जरिए हुआ भुगतान भी अधिकृत माना जाएगा।

Fraudulent ट्रांजैक्शन किन मामलों में माना जाएगा?

RBI के अनुसार निम्न स्थितियों में ट्रांजैक्शन फ्रॉड की श्रेणी में आ सकता है:

  • किसी व्यक्ति ने ग्राहक की जानकारी धोखे से हासिल कर ट्रांजैक्शन कर दिया हो
     
  • ग्राहक को दबाव या धमकी देकर भुगतान करवाया गया हो
     
  • ग्राहक को किसी स्कैमर ने वैध व्यक्ति बनकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए धोखा दिया हो

बैंक और ग्राहक की लापरवाही कैसे तय होगी?

RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि फ्रॉड की स्थिति में बैंक और ग्राहक दोनों की जिम्मेदारी कैसे तय होगी।

बैंक की लापरवाही

यदि बैंक की ओर से ये कमियां पाई जाती हैं तो उसे लापरवाही माना जा सकता है:

  • सुरक्षित डिजिटल सिस्टम बनाए रखने में विफलता
     
  • समय पर ट्रांजैक्शन अलर्ट न भेजना
     
  • फ्रॉड रिपोर्ट करने के लिए पर्याप्त चैनल उपलब्ध न कराना

ग्राहक की लापरवाही

ग्राहक की लापरवाही इन स्थितियों में मानी जा सकती है:

  • OTP या पासवर्ड किसी से साझा करना
     
  • बैंक के फ्रॉड अलर्ट को नजरअंदाज करना
     
  • संदिग्ध या मालवेयर ऐप डाउनलोड करना

Third-Party Breach क्या होता है?

कई बार फ्रॉड बैंक या ग्राहक की गलती से नहीं बल्कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम में शामिल किसी तीसरे पक्ष की वजह से होता है।

RBI के अनुसार Third-Party Breach में शामिल हो सकते हैं:

  • Third-Party Application Providers (TPAP)
     
  • Payment Aggregators
     
  • Payment Gateways
     
  • Telecom Service Providers

यदि फ्रॉड इन संस्थाओं की वजह से हुआ है तो उसे third-party breach माना जाएगा।

डिजिटल फ्रॉड होने पर क्या करना चाहिए?

RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे ग्राहकों को तुरंत शिकायत दर्ज करने के लिए जागरूक करें।

यदि डिजिटल फ्रॉड हो जाए तो ग्राहक को तुरंत:

  • अपने बैंक को सूचित करना चाहिए
     
  • National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए
     
  • या National Cyber Crime Helpline 1930 पर कॉल करनी चाहिए

जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी ही जल्दी कार्रवाई संभव होगी।

छोटे डिजिटल फ्रॉड मामलों में मिलेगा मुआवजा

RBI के नए ड्राफ्ट में छोटे डिजिटल फ्रॉड मामलों के लिए मुआवजा व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।

यदि किसी ग्राहक को ₹50,000 तक का नुकसान होता है तो:

  • ग्राहक को कुल नुकसान का 85% या
     
  • अधिकतम ₹25,000 तक का मुआवजा मिल सकता है।
     
  • यह सुविधा जीवन में केवल एक बार उपलब्ध होगी।

मुआवजा पाने के लिए जरूरी शर्त

  • फ्रॉड की शिकायत 5 दिनों के भीतर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन पर करनी होगी।
     
  • छोटे मामलों में मुआवजे का अधिकांश हिस्सा RBI द्वारा दिया जाएगा, जबकि कुछ योगदान ग्राहक के बैंक और लाभार्थी बैंक की ओर से होगा।
     
  • यदि बाद में पैसा वापस मिल जाता है तो मुआवजे की राशि को उसी अनुसार समायोजित किया जाएगा।
     
  • डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच RBI का यह प्रस्तावित ढांचा ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बन सकता है।
     
  • UPI, मोबाइल बैंकिंग और कार्ड भुगतान में होने वाले फ्रॉड के मामलों में स्पष्ट नियम, जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था और मुआवजा प्रणाली डिजिटल बैंकिंग में भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

RBI के प्रस्तावित नए नियम ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। स्पष्ट नियम, जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था और मुआवजे का प्रावधान डिजिटल बैंकिंग को और सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद कर सकता है।

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