आज 1 अगस्त 2026 का दिन भारतीय सेना (Indian Army) और पूरे देश के लिए बहुत ही खास और गर्व का दिन है। आज ही के दिन सिख रेजीमेंट (Sikh Regiment) अपना 'रेज़िंग डे' (Raising Day / स्थापना दिवस) मना रही है।
भारतीय थल सेना की पैदल सेना (Infantry) में शामिल यह टुकड़ी दुनिया की सबसे निडर, अनुशासित और अत्यधिक सम्मानित सैन्य इकाइयों में से एक है। 1846 से लेकर 2026 तक के अपने 180 वर्षों के ऐतिहासिक सफर में इस रेजीमेंट ने हर जंग में अपनी बहादुरी, अनुशासन और देशप्रेम का लोहा मनवाया है।
झारखंड स्थित इसके रामगढ़ कैंट सेंटर से लेकर देश की बर्फीली सीमाओं तक, आज के दिन जवानों की वीरता और शहीदों के बलिदान को गर्व के साथ याद किया जाता है। आइए, सिख रेजीमेंट के गौरवशाली सफर, रामगढ़ सेंटर, इसके आदर्श वाक्य, सारागढ़ी की लड़ाई और इसके परमवीर चक्र वीरों के बारे में बेहद सरल भाषा में जानते हैं।
मुख्य विवरण | जानकारी |
|---|---|
रेज़िंग डे (Raising Day / स्थापना दिवस) | 1 अगस्त (1846 से निरंतर) |
मुख्य प्रशिक्षण केंद्र (Regimental Centre) | सिख रेजीमेंट सेंटर, रामगढ़ कैंट (झारखंड) |
रामगढ़ छावनी की स्थापना | वर्ष 1941 (दामोदर नदी के तट पर) |
रेजीमेंटल मोटो (मूल मंत्र) | निश्चय कर अपनी जीत करों (I Fight For Sure To Win) |
युद्ध घोष (War Cry) | बोले सो निहाल, सत श्री अकाल |
रेजीमेंटल प्रतीक (Insignia) | चक्र (Chakra) के भीतर गरजता हुआ शेर (Singh) |
मुख्य युद्ध सम्मान दिवस | 12 सितंबर (सारागढ़ी दिवस) |
सिख रेजीमेंट का इतिहास 19वीं शताब्दी के मध्य से शुरू होता है:
सिख रेजीमेंट का दिल इसका ट्रेनिंग सेंटर है, जो झारखंड के रामगढ़ कैंट (Ramgarh Cantonment) में स्थित है। आज रेज़िंग डे (Raising Day) पर यहाँ विशेष परेड और शहीदों को श्रद्धांजलि देने का भव्य आयोजन किया जाता है।
स्थापना और स्थान: रामगढ़ छावनी बोर्ड की स्थापना वर्ष 1941 में हुई थी। यह सुंदर छावनी दामोदर नदी के किनारे बसी है।
क्षेत्रफल और आबादी: यह कैंट लगभग 9,312 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की आबादी लगभग 88,781 थी, जो अब 1 लाख से ऊपर हो चुकी है।
8 वार्ड व्यवस्था: शुरुआत में यहाँ 7 वार्ड थे, लेकिन 2007 में परिसीमन के बाद अब कुल 8 वार्ड हैं।
दो रेजीमेंटल सेंटर: रामगढ़ कैंट की सबसे बड़ी बात यह है कि यहाँ दो प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण केंद्र स्थित हैं:
सिख रेजीमेंटल सेंटर (Sikh Regimental Centre)
पंजाब रेजीमेंटल सेंटर (Punjab Regimental Centre)
जंग के मैदान में उतरने से पहले जवानों का जोश बढ़ाने के लिए ये तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण होती हैं:
"निश्चय कर अपनी जीत करों" — यह पंक्तियां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की रचना से ली गई हैं। इसका अर्थ है कि जब भी युद्ध के मैदान में उतरो, तो मन में केवल जीत का पक्का भरोसा लेकर उतरो।
"बोले सो निहाल, सत श्री अकाल" — जब सिख रेजीमेंट के जवान यह जयकारा लगाते हैं, तो दुश्मनों के छक्के छूट जाते हैं।
रेजीमेंट के निशान में एक तीक्ष्ण चक्र (Chakra) है, जिसके बीच में निडरता का प्रतीक शेर (Singh) बना हुआ है।
सिख रेजीमेंट का नाम आते ही सारागढ़ी की लड़ाई याद आती है, जो विश्व इतिहास की सबसे महान लड़ाइयों में से एक है।
36वें सिख (आज की 4 सिख) के हवलदार ईशर सिंह की अगुवाई में केवल 21 सिख जवानों ने 10,000 अफगान हमलावरों को रोक कर रखा था।
जवानों ने आत्मसमर्पण करने से साफ मना कर दिया और अपनी अंतिम गोली और अंतिम सांस तक लड़ते हुए शहीद हो गए।
इस वीरता के लिए ब्रिटिश संसद ने खड़े होकर श्रद्धांजलि दी थी। सभी 21 शहीदों को सर्वोच्च सम्मान 'इण्डियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' (IOM) मिला। यह लड़ाई यूनेस्को (UNESCO) द्वारा दुनिया की 10 सबसे प्रसिद्ध लड़ाइयों में गिनी जाती है।
1947 में भारत की आजादी के बाद भी सिख रेजीमेंट ने हर मोर्चे पर देश की रक्षा की है। इसे 2 परमवीर चक्र (PVC) मिले हैं:
1948 में कश्मीर के तिथवाल मोर्चे पर गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने दुश्मन के कई हमलों को अकेले नाकाम किया। वे देश के पहले जीवित परमवीर चक्र विजेता बने।
1962 में चीन के खिलाफ अरुणाचल प्रदेश में केवल एक प्लाटून के साथ चीनी सेना को रोके रखा और मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित हुए।
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जय हिंद!
सिख रेजीमेंट का रेज़िंग डे (स्थापना दिवस) हर साल 1 अगस्त को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1 अगस्त 1846 को हुई थी।
सिख रेजीमेंट का मुख्य प्रशिक्षण केंद्र (Regimental Centre) रामगढ़ कैंट (झारखंड) में स्थित है।
रामगढ़ छावनी बोर्ड की स्थापना वर्ष 1941 में हुई थी। यह लगभग 9,312 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
मोटो: निश्चय कर अपनी जीत करों
युद्ध घोष: बोले सो निहाल, सत श्री अकाल


