logo
search_icon

Part V: मेरे दादाजी L/Nk Gobardhan Adhikari की कहानी

2983 Views

ये कहानी मेरे दिल में उतनी ही गहरी है जितनी मेरी खुद की पहचान। ये सिर्फ एक वीरता की कहानी नहीं है, ये मेरे वजूद की बुनियाद है। पीढ़ी दर पीढ़ी ये कहानी हमारी family में ऐसे बहती आई है जैसे खून हमारी रगों में। ये कहानी सिर्फ यादों की नहीं, बल्कि उस प्यार, त्याग और बेइंतहा हिम्मत की है, जिसने मेरी जिंदगी की नींव रखी और आज भी मुझे आगे बढ़ने की ताकत देती है।

15 दिसंबर 1971 – Indo-Pak war अपने अंतिम दौर में थी। Eastern Sector में 5th Gorkha Rifles की company को जिम्मेदारी मिली थी कि दुश्मन के बचे हुए pockets of resistance को खत्म करना है। मेरे दादा, तब Lance Naik थे, उन्हीं वीरों में से एक थे, जो इस जिम्मेदारी को निभा रहे थे। ज़मीन पर पहले ही शहीदों का खून बिखरा था, हवा में gunpowder की गंध और तबाही की चुप्पी थी।

War-torn landscape में अपने section को lead करते हुए मेरे दादा आगे बढ़ रहे थे। हर तरफ टूटी हुई buildings, जले हुए घर, twisted metal के टुकड़े और वो सन्नाटा, जो किसी भी gunfire से ज्यादा डरावना था। हर कदम पर मौत की परछाईं थी, लेकिन मेरे दादा के कदम नहीं रुके। उन्हें पता था कि उनकी जिंदगी अब उनकी अपनी नहीं है। ये जिंदगी उनके साथियों, उनकी regiment और उस तिरंगे की थी, जिसके लिए उन्होंने कसम खाई थी।

जैसे ही उनकी टुकड़ी एक मोड़ पर पहुंची, दुश्मन ने पास की building से medium machine gun से fire करना शुरू कर दिया। गोलियों की तेज़ बौछार में सबने instinctively cover लिया, पर मेरे दादा डरे नहीं। Calm, resolute aur fearless, उन्होंने सिर्फ एक पल के लिए सोचा – अपने साथियों की जान, mission की सफलता और उन परिवारों की उम्मीदें जो अपने loved ones के लौटने का इंतजार कर रहे थे।

बिना देर किए, वो machine gun की तरफ दौड़ पड़े। पता था कि जान खतरे में है, पर duty और camaraderie उनके लिए किसी भी डर से बड़ी थी। Window में बैठे gunner की position का अंदाज़ा लगाकर उन्होंने precision से grenade फेंका। एक धमाका हुआ, और machine gun खामोश हो गई। लेकिन खतरा अभी टला नहीं था।

जैसे ही वो अपने साथियों की ओर लौटे, सामने की दूसरी building से एक और machine gun ने fire किया। दुश्मन की गोलियों का वो सैलाब था, जो पल भर में किसी को भी चीर सकता था। पर मेरे दादा पीछे नहीं हटे। Cover लेने का भी ख्याल नहीं आया। उनका duty sense किसी भी fear से बड़ा था। उन्हें पता था कि अगर वो ये threat neutralize नहीं करेंगे, तो उनके साथी खुली target बन जाएंगे।

बिना रुके, बिना सोचे, वो फिर आगे बढ़े। हर कदम पर उनके कंधों पर जिम्मेदारी, देश के लिए प्यार और अपने brothers-in-arms के लिए loyalty का बोझ था।

फिर वो पल आया – दुश्मन की machine gun ने एक बार फिर fire किया, और इस बार गोलियां उनके सीने में उतर गईं। दर्द की लहरों के बीच, खून से लथपथ ज़मीन पर गिरते हुए भी उनके ख्याल में सिर्फ उनके साथी थे – उनका safety, उनका survival। उन्होंने अपने लिए कभी कुछ नहीं सोचा, ना अपनी family के बारे में, ना अपनी यादों के बारे में। उनके लिए सबसे बड़ी duty थी – अपने साथियों की जान बचाना।

उस दिन मेरे दादा शहीद हो गए। वो घर वापस नहीं आए। लेकिन उनके जाने के बाद जो legacy उन्होंने छोड़ी, वो medals या war memorial तक सीमित नहीं थी। उन्होंने अपने नाम के साथ-साथ एक जिंदा विरासत छोड़ी – selflessness और love की legacy, जो आज भी हमारी family की रगों में दौड़ती है।

उन्होंने सब कुछ दे दिया – ना किसी glory के लिए, ना medals के लिए – सिर्फ अपने उन साथियों के लिए, जिनके साथ उन्होंने कंधे से कंधा मिलाकर लड़ा था। उनके sacrifice के बारे में जानने वाला शायद कोई नहीं था, पर उन्हें recognition की भूख कभी थी ही नहीं। उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान था – अपने देश और अपने brothers-in-arms की safety।

War अक्सर romanticize किया जाता है, लेकिन असली सच्चाई इससे कहीं ज्यादा raw और painful है। ये कीमत खून, आंसुओं और उन परिवारों की चुप्पी में चुकाई जाती है, जो अपने loved ones को हमेशा के लिए खो देते हैं।

आज जब मैं अपने दादा की तस्वीर देखता हूं, तो दिल में एक अजीब सा दर्द उठता है। एक ऐसा grief, जो पूरी तरह समझ नहीं पाया था जब तक खुद बड़ा नहीं हुआ। ये वही grief है, जो हर उस family के सीने में धड़कता है, जिसने अपने किसी member को देश की सेवा में खोया है।

लेकिन इस grief के साथ एक गर्व भी है – ऐसा गर्व, जो words में बयां करना मुश्किल है। Lance Naik Gobardhan Adhikari शायद हज़ारों जवानों में से एक थे, पर मेरे लिए वो सब कुछ हैं। वो love, sacrifice aur courage का symbol हैं। उनकी जिंदगी, उनकी शहादत और उनकी spirit – यही मेरी strength की जड़ें हैं, इसी मिट्टी से मेरी duty aur honour की सोच उगी है।

ये कहानी सिर्फ उनकी नहीं है – ये हमारी family की पहचान है, ये इस देश की कहानी है। उनकी legacy एक ऐसी ज्वाला है, जो कभी बुझ नहीं सकती। ये selflessness और bravery की रोशनी है, जो आने वाली हर पीढ़ी को रास्ता दिखाएगी। और जब तक मैं हूं, ये कहानी मैं सुनाता रहूंगा – ताकि सबको पता चले कि सच्ची सेवा, सच्चा त्याग और सच्चा प्यार क्या होता है।

ऐसी और सच्चे वीरो की कहानिये के लिए जुड़े रहिए FaujiBeats के साथ।

जय हिंद!


आप Faujibeats को Instagram पर भी follow कर सकते हैं – यहाँ click करे।



Disclaimer : Faujibeats एक public information platform है, फौजी परिवार से अनुरोध है कि यहाँ दी गई जानकारी को सिर्फ़ संदर्भ (reference) के रूप में उपयोग करें और जानकारी की पुष्टि करने के लिए सरकार की वेबसाइट को refer करें। Fauji Beats पर जो image उपयोग किए गए हैं, वे असली चित्र नहीं हैं और केवल demonstration के लिए ली गए हैं। आपकी राय और सुधार के लिए हम हमेशा तयार हैं। यदी आपको कुछ भी सुधारने योग्य लगे, तो कृपया alert@faujibeats.com पर लिखें। जय हिंद!

Related Articles

Motivational
भारत के फास्टेस्ट मैन बने इंडियन नेवी के गुरिंदरवीर सिंह, 10.09 सेकंड में रचा इतिहास
6700
4.5
Motivational
पहली महिला IAF Officer बनीं Cat-A Flying Instructor, स्क्वाड्रन लीडर सान्या ने रचा इतिहास
6500
4.5
Motivational
क्या सच में आज भी सीमा की रखवाली करते हैं शहीद फौजी बाबा हरभजन सिंह?
7000
4.5
Disclaimer : Faujibeats एक public information platform है, फौजी परिवार से अनुरोध है कि यहाँ दी गई जानकारी को सिर्फ़ संदर्भ (reference) के रूप में उपयोग करें और जानकारी की पुष्टि करने के लिए सरकार की वेबसाइट को refer करें। Fauji Beats पर जो image उपयोग किए गए हैं, वे असली चित्र नहीं हैं और केवल demonstration के लिए ली गए हैं। आपकी राय और सुधार के लिए हम हमेशा तयार हैं। यदी आपको कुछ भी सुधारने योग्य लगे, तो कृपया alert@faujibeats.com पर लिखें। जय हिंद!