आजकल OTP फ्रॉड देश के लिए एक बड़ी समस्या बन चुका है। हमारी सेना के जवान सरहद पर देश की सुरक्षा करते हैं, लेकिन उनके परिवार अक्सर OTP फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल देश भर में OTP फ्रॉड के लगभग 20% मामले फौजी परिवारों से जुड़े थे। इस तरह की घटनाएं ना सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि मानसिक तनाव का कारण भी बनती हैं।
OTP यानी वन टाइम पासवर्ड, आपके ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को सुरक्षित बनाने के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच होता है। लेकिन, साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं जिससे वो आपके OTP को चुराकर आपके बैंक अकाउंट को खाली कर सकते हैं। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2021 से दिसंबर 2023 के बीच साइबर क्राइम के कारण देश को ₹10,319 करोड़ का नुकसान हुआ है, जिसमें OTP फ्रॉड का एक बड़ा हिस्सा है।
सरकार इस समस्या से निपटने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसमें SBI कार्ड्स और प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां भी शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट में, ग्राहक की लोकेशन और OTP डिलीवरी की लोकेशन को ट्रैक किया जाएगा। अगर दोनों लोकेशन में कोई अंतर पाया जाता है, तो यह फिशिंग अटैक का संकेत हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका OTP आपके बेंगलुरु के पते पर भेजा जाना था, लेकिन वो उत्तर प्रदेश में डिलीवर हुआ, तो ये एक खतरे की घंटी है।
इस समाधान के लिए बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर काम करेंगी:
अगर दोनों जगह अलग-अलग निकलीं तो कस्टमर को बताया जाएगा कि कोई फ़िशिंग अटैक हो सकता है। इस जानकारी को ट्रायंगुलेट करके, सिस्टम रेड फ्लैग उठा सकता है और ग्राहकों को अलर्ट कर सकता है, या संदिग्ध मामलों में OTPs को ब्लॉक भी कर सकता है।
यह नया प्रयास, भले ही अभी परीक्षण के चरण में है, लेकिन यह भारत में एक सुरक्षित डिजिटल भविष्य की उम्मीद जगाता है। हमें उम्मीद है कि इस पहल से OTP फ्रॉड के मामलों में कमी आएगी और हम सभी एक सुरक्षित डिजिटल दुनिया का आनंद ले पाएंगे।
अगली बार तक...
Jai Hind!


