15 मार्च 2026 को सामने आए एक मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर किया। पुणे में तैनात 51 वर्षीय एक आर्मी कर्मी से लगभग ₹40 लाख की ठगी की गई। ठगों ने सोशल मीडिया और WhatsApp के जरिए उनसे संपर्क किया, खुद को एक बड़ी वित्तीय सेवा कंपनी का अधिकारी और उसकी सहायक बताया, और शेयर व क्रिप्टो निवेश के नाम पर उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया। कुछ महीनों के भीतर उन्होंने कई ट्रांजैक्शन में लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए।
जब उन्होंने पैसा निकालने की कोशिश की तो उनसे और पैसे “टैक्स” के नाम पर मांगे गए। तभी उन्हें एहसास हुआ कि यह पूरा निवेश एक संगठित ऑनलाइन फ्रॉड था और पैसा अलग-अलग म्यूल अकाउंट्स में भेजा जा चुका था। इस मामले में पुणे के वानवाड़ी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है।
आजकल ऑनलाइन ठग पहले से ज्यादा चालाक हो गए हैं। वे सोशल मीडिया, WhatsApp ग्रुप, नकली ट्रेडिंग ऐप, फर्जी ऑफर और नकली पहचान का इस्तेमाल करके लोगों का भरोसा जीतते हैं।
चिंता की बात यह भी है कि कई मामलों में फौजी, पूर्व सैनिक और उनके परिवार भी इन स्कैम का शिकार हो रहे हैं।
इसके पीछे कई कारण होते हैं:
इसलिए यह जरूरी है कि हर व्यक्ति, खासकर फौजी समुदाय, ऐसे स्कैम को पहचानना सीखे।
इस स्कैम में ठग किसी परिचित व्यक्ति की तरह बनकर मैसेज भेजते हैं। वे ऐसा दिखाते हैं कि जैसे कोई भरोसेमंद व्यक्ति मदद मांग रहा हो।
मान लीजिए एक सैनिक फील्ड पोस्टिंग में है। अचानक उसे WhatsApp पर मैसेज आता है:
“भाई मैं यूनिट से बोल रहा हूं। अभी तुरंत एक जरूरी भुगतान करना है। नेटवर्क समस्या है इसलिए कॉल नहीं कर सकता। क्या आप अभी ₹20,000 भेज सकते हैं?”
ऐसे मामलों में ठग अक्सर तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाते हैं।
यह स्कैम देखने में बहुत सामान्य लगता है इसलिए लोग आसानी से फंस जाते हैं।
ठग कहते हैं कि गलती से आपके नंबर पर OTP या लॉगिन कोड चला गया है और उसे वापस भेजने को कहते हैं।
किसी सैनिक को मैसेज आता है: “सर, मैंने गलती से आपके नंबर पर WhatsApp लॉगिन कोड भेज दिया है। कृपया मुझे भेज दें, मुझे तुरंत लॉगिन करना है।”
अगर आपने कोड दे दिया तो ठग आपके WhatsApp अकाउंट को हैक कर सकते हैं और फिर आपके संपर्कों से पैसे मांग सकते हैं।
इसमें ठग खुद को टेक सपोर्ट या बैंक अधिकारी बताकर मदद की पेशकश करते हैं।
वे कहते हैं कि आपके अकाउंट या फोन में कोई समस्या है और उसे ठीक करने के लिए स्क्रीन शेयर करना होगा।
मान लीजिए किसी रिटायर्ड फौजी को मैसेज आता है: “आपके बैंक अकाउंट में सिक्योरिटी समस्या है। हमारी टीम आपकी मदद करेगी। कृपया स्क्रीन शेयर करें ताकि हम समस्या ठीक कर सकें।”
एक बार स्क्रीन शेयर हो जाए तो ठग:
इस तरह के स्कैम में ठग बड़े ब्रांड या कंपनियों का नाम इस्तेमाल करते हैं।
वे ऐसे संदेश भेजते हैं जिनमें इनाम, गिफ्ट या विशेष ऑफर का लालच दिया जाता है।
एक सैनिक के फोन पर मैसेज आता है:
“Indian Army Special Offer: आपको फ्री स्मार्टफोन जीतने का मौका मिला है। अभी लिंक पर क्लिक करें।” ऐसे लिंक अक्सर फर्जी वेबसाइट पर ले जाते हैं जहां आपकी निजी जानकारी चुरा ली जाती है।
इस स्कैम में ठग WhatsApp या सोशल मीडिया कंपनी के सपोर्ट एजेंट बनकर संपर्क करते हैं।
वे कहते हैं कि आपके अकाउंट में कोई सुरक्षा समस्या है।
किसी फौजी परिवार को मैसेज आता है: “WhatsApp Support: आपके अकाउंट में सुरक्षा समस्या पाई गई है। कृपया अपना लॉगिन कोड भेजें ताकि हम इसे सुरक्षित कर सकें।”
ध्यान रखें कि कोई भी असली कंपनी कभी भी OTP या लॉगिन कोड नहीं मांगती।
डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ-साथ जोखिम भी बढ़ गया है। पुणे में आर्मी कर्मी के साथ हुई ठगी यह याद दिलाती है कि ऑनलाइन जागरूकता आज बेहद जरूरी है।
चाहे आप देश की सेवा में लगे फौजी हों, पूर्व सैनिक हों या आम नागरिक, थोड़ी सी सावधानी आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।
ऑनलाइन निवेश, ऑफर या संदेश पर भरोसा करने से पहले हमेशा उसकी सच्चाई जरूर जांचें।
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जय हिन्द!
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