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International Women's Day Special: सशस्त्र बलों की वीरांगनाएं

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भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी आज तेजी से बढ़ रही है। लेकिन यह सफर आसान नहीं था। कई दशकों तक सेना, नौसेना और वायुसेना को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। फिर भी कुछ साहसी महिलाओं ने इस धारणा को चुनौती दी और अपने साहस, कड़ी मेहनत और देशभक्ति से नए इतिहास लिखे।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हम उन महिलाओं को याद करते हैं जिन्होंने पहली बार वह कदम उठाया, जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता बनाया। भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी से लेकर युद्धपोत की कमान संभालने वाली नौसेना अधिकारी तक, इन महिलाओं की कहानियां प्रेरणा से भरी हैं।

नीचे उन नौ महिलाओं की कहानी है जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में अपने नाम से एक नया अध्याय लिखा।

मेजर प्रिया झिंगन – भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी

मेजर प्रिया झिंगन भारतीय सेना की पहली महिला गैर-चिकित्सा अधिकारी के रूप में इतिहास में दर्ज हैं। 1992 में उन्होंने उस समय के सेना प्रमुख जनरल सुनीथ फ्रांसिस रोड्रिग्स को पत्र लिखकर सेना में महिलाओं को शामिल करने की मांग की। उनके साहसिक कदम के बाद 1992 में भारतीय सेना ने पहली बार 25 महिलाओं के बैच को शामिल किया। प्रिया झिंगन को कैडेट नंबर 001 दिया गया। कठोर प्रशिक्षण के बाद उन्हें 6 मार्च 1993 को कमीशन मिला। कानून की पढ़ाई के कारण उन्हें जज एडवोकेट जनरल शाखा में नियुक्त किया गया। उन्होंने लगभग दस वर्षों तक सेवा दी और 2002 में मेजर पद से सेवानिवृत्त हुईं। 2018 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।

एयर मार्शल पद्मावती बंदोपाध्याय – भारतीय वायुसेना की पहली महिला एयर मार्शल

एयर मार्शल पद्मावती बंदोपाध्याय भारतीय वायुसेना की पहली महिला एयर मार्शल हैं और सशस्त्र बलों में तीन-सितारा रैंक पाने वाली शुरुआती महिलाओं में शामिल हैं। 1968 में वायुसेना में शामिल होने के बाद उन्होंने चिकित्सा और एयरोस्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने एएफएमसी से पढ़ाई की और बाद में एयरोस्पेस मेडिसिन, डिफेंस साइंस तथा फिजियोलॉजी में उच्च डिग्रियां प्राप्त कीं। उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी सेवा दी। हाई एल्टीट्यूड फिजियोलॉजी और पायलट प्रशिक्षण पर उनका शोध बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 2006 में वह डायरेक्टर जनरल मेडिकल सर्विसेज के पद से सेवानिवृत्त हुईं और बाद में सामाजिक स्वास्थ्य कार्यों में सक्रिय रहीं।

कमांडर प्रेरणा देवस्थली – युद्धपोत की कमान संभालने वाली पहली महिला

कमांडर प्रेरणा देवस्थली भारतीय नौसेना की पहली महिला अधिकारी बनीं जिन्होंने किसी युद्धपोत की कमान संभाली। मुंबई में जन्मी प्रेरणा ने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और 2009 में भारतीय नौसेना में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हुईं। अपने करियर के दौरान वह TU-142 समुद्री निगरानी विमान पर पहली महिला ऑब्जर्वर बनीं और P-8I विमान से महत्वपूर्ण मिशनों में भाग लिया। दिसंबर 2023 में नौसेना दिवस के अवसर पर उन्हें पश्चिमी बेड़े के अंतर्गत INS त्रिंकाट का कमांडिंग ऑफिसर बनाया गया। उसी समय उनके भाई कमांडर ईशान देवस्थली भी एक अन्य युद्धपोत के कमांडर बने, जो भारतीय नौसेना के इतिहास में एक अनोखा क्षण था।

फ्लाइट लेफ्टिनेंट हरिता कौर देओल – भारतीय वायुसेना की पहली महिला सोलो पायलट

फ्लाइट लेफ्टिनेंट हरिता कौर देओल भारतीय वायुसेना की पहली महिला बनीं जिन्होंने प्रशिक्षण के दौरान विमान को अकेले उड़ाकर इतिहास रचा। उनका जन्म 1971 में चंडीगढ़ में एक सैन्य परिवार में हुआ था। 1993 में वह वायुसेना में चुनी गईं और कठोर प्रशिक्षण के बाद ट्रांसपोर्ट पायलट के रूप में नियुक्त हुईं। 2 सितंबर 1994 को उन्होंने Avro HS-748 विमान को सोलो उड़ाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। यह उपलब्धि उस समय महिलाओं के लिए नई संभावनाओं का प्रतीक बनी। 1996 में एक नियमित उड़ान के दौरान विमान दुर्घटना में उनका निधन हो गया। फिर भी उनका योगदान भारतीय सैन्य इतिहास में हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

स्क्वाड्रन लीडर अवनी चतुर्वेदी – भारत की पहली महिला फाइटर पायलटों में से एक

स्क्वाड्रन लीडर अवनी चतुर्वेदी भारत की पहली महिला फाइटर पायलटों में से एक हैं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के रीवा में हुआ और उन्होंने बनस्थली विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 2016 में उन्हें भावना कंठ और मोहना सिंह के साथ भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया। यह भारतीय सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम था। 2018 में अवनी ने MiG-21 बाइसन विमान पर सोलो उड़ान भरकर एक और उपलब्धि हासिल की। उनके इस कदम ने भारतीय वायुसेना में महिलाओं के लिए नए अवसरों का रास्ता खोला। उन्हें उनके योगदान के लिए नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह – राफेल उड़ाने वाली महिला पायलट

स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह भारतीय वायुसेना की उन चुनिंदा महिला पायलटों में शामिल हैं जिन्होंने अत्याधुनिक राफेल फाइटर जेट उड़ाया। वाराणसी में जन्मी शिवांगी को बचपन से ही विमानन में रुचि थी। 2017 में वायुसेना में कमीशन मिलने के बाद उन्होंने MiG-21 बाइसन उड़ाना शुरू किया। बाद में उन्हें अंबाला स्थित 17 स्क्वाड्रन “गोल्डन एरोस” में राफेल पायलट के रूप में शामिल किया गया। उनकी कहानी उस समय चर्चा में आई जब विदेशी मीडिया में उनके बारे में गलत दावे किए गए, जिन्हें बाद में आधिकारिक रूप से खारिज किया गया। आज वह भारतीय वायुसेना में महिला पायलटों के लिए एक प्रेरक चेहरा हैं।

सैपर शांति तिग्गा – भारतीय सेना की पहली महिला जवान

सैपर शांति तिग्गा भारतीय सेना की पहली महिला जवान के रूप में जानी जाती हैं। उन्होंने 35 वर्ष की उम्र में और दो बच्चों की मां होने के बावजूद सेना में भर्ती होकर एक अनोखा उदाहरण पेश किया। 2011 में उन्होंने टेरिटोरियल आर्मी की 969 रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट में शामिल होकर इतिहास बनाया। शारीरिक परीक्षण के दौरान उन्होंने कई पुरुष उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन किया और अपने प्रशिक्षण में उत्कृष्ट अंक हासिल किए। उन्हें सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु का सम्मान भी मिला। उनकी कहानी यह दिखाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के सामने उम्र या सामाजिक धारणाएं मायने नहीं रखतीं।

कर्नल सोफिया कुरैशी – वैश्विक मंच पर भारत का नेतृत्व करने वाली अधिकारी

कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की एक प्रतिष्ठित अधिकारी हैं जिन्होंने कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में योगदान दिया है। 2016 में उन्होंने बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास “फोर्स-18” में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व किया, जो किसी महिला अधिकारी के लिए पहली बार था। गुजरात के वडोदरा में जन्मी सोफिया कुरैशी ने बायोकैमिस्ट्री में पढ़ाई की और चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भी सेवा दी। 2025 में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की ओर से महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।

विंग कमांडर व्योमिका सिंह – आसमान में साहस की मिसाल

विंग कमांडर व्योमिका सिंह भारतीय वायुसेना की एक अनुभवी हेलीकॉप्टर पायलट हैं जिनके नाम 2500 से अधिक उड़ान घंटे दर्ज हैं। उन्होंने चेतक और चीता जैसे हेलीकॉप्टरों पर जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश जैसे कठिन इलाकों में कई महत्वपूर्ण बचाव और राहत मिशनों का नेतृत्व किया है। उनका सपना बचपन में तब शुरू हुआ जब उन्हें अपने नाम “व्योमिका” का अर्थ पता चला, जिसका मतलब है आसमान की स्वामिनी। उन्होंने एनसीसी से शुरुआत की, इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में यूपीएससी के माध्यम से वायुसेना में शामिल हुईं। उनकी उपलब्धियां भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती हैं।

इन सभी महिलाओं की कहानियां यह साबित करती हैं कि साहस, समर्पण और मेहनत से किसी भी सीमा को पार किया जा सकता है। भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी आने वाले समय में और भी बड़े बदलाव का संकेत देती है।

FaujiBeats भारतीय रक्षा सेवाओं की हर उस महिला को सलाम करता है, जो साहस, समर्पण और कर्तव्य के साथ देश की सेवा कर रही हैं। 

ऐसी और प्रेरक जानकारी के लिए जुड़े रहें FaujiBeats के साथ।

जय हिंद।



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