आज हम सबकी ज़िंदगी लगभग पूरी तरह ऑनलाइन (online) हो गई है फिर चाहे वो पेमेंट (payment) करना हो, दस्तावेज़ भेजना हो या दोस्तों से बात करनी हो। इस बीच एक बहुत महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है, अब भारत में 86% से ज़्यादा घर इंटरनेट (Internet) से जुड़े हुए। इसके साथ मोबाइल और ऑनलाइन बैंकिंग (mobile and online banking) चैनलों के माध्यम से भी फर्जी कॉल, UPI लिंक, स्क्रीन शेयरिंग और QR कोड ट्रैपिंग के जरिए धोखाधड़ी लगातार बढ़ रही है।
सरकार के आधिकारिक डेटा भी इस समस्या की गंभीरता को दिखाते हैं 2022 में साइबर सुरक्षा-घटनाएँ लगभग 10.29 लाख थीं, जो 2024 में बढ़कर करीब 22.68 लाख तक पहुँच गई हैं। इसी प्रकार, धोखाधड़ी में इस्तेमाल के लिए 9.42 लाख से अधिक सिम कार्ड और 2,63,348 IMEI ब्लॉक किए जा चुके हैं।
इसके अलावा हाल के दिनों में भारतीय सशस्त्र बल कर्मियों को निशाना बनाते हुए साइबर फ्रॉड (cyber fraud), नकली पहचान, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और ऑनलाइन ठगी के कई गंभीर मामले सामने आए हैं। धोखेबाज़ कभी खुद को आर्मी ऑफिसर बताकर भरोसा जीत ते हैं, तो कभी फेक दस्तावेज़ और पहचान पत्र दिखाकर पैसों की मांग करते हैं। कई मामलों में रिटायर्ड फौजियों को भी टारगेट किया गया है, जहां प्रतिष्ठा और सेवा से जुड़ी पहचान को ही हथियार बनाकर वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया।
इस बदलते डिजिटल माहौल में साइबर इंश्योरेंस एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बनकर उभरा है।
साइबर इंश्योरेंस एक ऐसी बीमा पॉलिसी है जो ऑनलाइन फ्रॉड, पहचान चोरी, बैंकिंग धोखाधड़ी, डेटा हानि, सोशल मीडिया हैकिंग और साइबर धमकी जैसी घटनाओं से होने वाले वित्तीय और मानसिक नुकसान की भरपाई में मदद करती है।
अगर आप फिशिंग, UPI फ्रॉड, नकली कस्टमर केयर कॉल, QR कोड ट्रिक या कार्ड स्किमिंग के शिकार हो जाते हैं, तो साइबर इंश्योरेंस:
डिजिटल दुनिया के बढ़ते जोखिमों के बीच, साइबर इंश्योरेंस अब एक आवश्यकता बन चुका है। एक गलत क्लिक, एक संदिग्ध लिंक या एक नकली कॉल आपकी सालों की कमाई मिटा सकता है।
यदि आप इसी तरह के उपयोगी और जागरूकता बढ़ानेवाली जानकारी पढ़ना चाहते हैं तो FaujiBeats के साथ जुड़े रहें और अपने परिवार, साथियों और यूनिट तक यह जानकारी पहुँचाएँ।
जय हिंद।
Tech
Tech
Tech