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डिजिटल धोखाधड़ी से कैसे बचें: फौजियों और पूर्व सैनिकों के लिए गाइड!

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एक सेवानिवृत्त फौजी अपने परिवार से बात करने के लिए अपने स्मार्टफोन का उपयोग कर रहा है। अचानक, उसे एक कॉल आती है जिसमें खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कहा जाता है कि उसका नाम एक बड़े घोटाले में शामिल है। डर और तनाव के कारण, फौजी अपनी सारी पेंशन और बचत कॉल करने वालों के खाते में ट्रांसफर कर देता है। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है; भारत में फौजियों और पूर्व सैनिकों को साइबर धोखाधड़ी का शिकार बनाने की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

उदाहरण के लिए, पुणे में एक सेवानिवृत्त सेना कर्नल को कॉल करके बताया गया कि वह ₹500 करोड़ के हवाला घोटाले में फंसे हैं। धोखाधड़ी करने वालों ने खुद को दिल्ली साइबर सेल का अधिकारी बताया और अधिकारी से ₹62 लाख विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवा लिए। इसी तरह, बेंगलुरु के 81 वर्षीय सेवानिवृत्त रक्षा अधिकारी को फर्जी पुलिस और CBI अधिकारी बनकर डराया गया, जिससे उन्होंने ₹1.8 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। 

भारत में साइबर धोखाधड़ी की स्थिति

डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में साइबर हमलों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र तेलंगाना, तमिलनाडु और दिल्ली हैं, जहाँ डिजिटल एडेप्शन और बेटर कनेक्टिविटी की वजह से मालवेयर (malware) एक्टिविटी बहुत ज्यादा है। 

खासकर कुछ सेक्टर्स जैसे बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज़ & इंश्योरेंस (BFSI), हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। इन सेक्टर्स में सेंसिटिव फाइनेंशियल और पर्सनल इन्फॉर्मेशन होने की वजह से ये साइबर अटैकर्स के लिए हाई-वैल्यू टारगेट्स हैं। 

इसी तरह, भारतीय सशस्त्र बल (Indian Armed Forces) भी सेंसिटिव जानकारी के साथ काम करते हैं, इसलिए उनके लिए भी साइबर सुरक्षा के प्रति हमेशा जागरूक रहना बहुत जरूरी है। इसलिए इन इंडस्ट्रीज़ और फोर्सेज़ में स्ट्रॉन्ग साइबर सिक्योरिटी और बेटर प्रोटेक्शन मेज़र्स अपनाना अनिवार्य है।

फौजियों को निशाना बनाने वाले साइबर और डिजिटल धोखाधड़ी के प्रकार

डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest Fraud):

धोखाधड़ी करने वाले खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताते हैं और डराकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

फिशिंग (Phishing):

फर्जी ईमेल, मैसेज या वेबसाइट के माध्यम से बैंक अकाउंट, पासवर्ड या पिन जैसी संवेदनशील जानकारी चुराना।

रैनसमवेयर (Ransomware Attack):

सिस्टम या फाइल्स को लॉक कर पैसे की मांग करना।

सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering):

मानव मनोविज्ञान का उपयोग करके भरोसा दिलाकर पैसे या जानकारी हासिल करना।

हवाला और फर्जी निवेश घोटाले (Hawala & Fake Investment Frauds):

बड़ी रिटर्न का लालच देकर नकली निवेश योजनाओं में फौजियों को फंसाना।

डेटा उल्लंघन (Data Breach):

सरकारी या निजी संस्थानों के डेटा को हैक करके संवेदनशील जानकारी लीक करना।

फौजियों को क्यों बनाते हैं निशाना?

फौजी और पूर्व सैनिकों को उनकी पेंशन, सेवाएँ और डिजिटल पहचान के कारण आसानी से निशाना बनाया जाता है। Lt Col Rochak Bakshi (Retd) के अनुसार, फौजियों के पास स्थिर आय होती है, जिससे वे धोखाधड़ी करने वालों के लिए आकर्षक लक्ष्य बनते हैं।

इसके अलावा, उनकी सीमित तकनीकी जानकारी (limited technical knowledge) और सरकारी अधिकारियों पर विश्वास उन्हें धोखाधड़ी का शिकार बनाता है।

फौजियों के लिए साइबर सुरक्षा उपाय

मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA)

  • यह एक सुरक्षा तकनीक है जिसमें लॉगिन करने के लिए सिर्फ़ पासवर्ड ही नहीं, बल्कि एक और सुरक्षा परत (जैसे OTP, बायोमेट्रिक, फिंगरप्रिंट या सिक्योरिटी टोकन) लगाई जाती है।
     
  • इससे अगर पासवर्ड किसी को मिल भी जाए, तब भी अकाउंट सुरक्षित रहता है।

संदिग्ध कॉल्स और ईमेल्स से सावधान रहें

  • साइबर अपराधी अक्सर नकली कॉल्स और ईमेल भेजकर बैंक डिटेल्स या पासवर्ड चुराने की कोशिश करते हैं।
     
  • ऐसे ईमेल में लिंक क्लिक करने या कॉल पर OTP/पर्सनल डिटेल बताने से बचें।

सुरक्षित नेटवर्क का उपयोग करें

  • सार्वजनिक Wi-Fi अक्सर सुरक्षित नहीं होता और इसमें डेटा चोरी का खतरा रहता है।
     
  • ऐसे नेटवर्क पर VPN (Virtual Private Network) का उपयोग करने से आपकी ऑनलाइन गतिविधि एन्क्रिप्टेड और सुरक्षित रहती है।

नियमित रूप से पासवर्ड बदलें

  • कमजोर या एक जैसा पासवर्ड कई अकाउंट्स के लिए इस्तेमाल करना बहुत ख़तरनाक है।
     
  • हर अकाउंट के लिए अलग, मजबूत पासवर्ड रखें और उन्हें समय-समय पर बदलते रहें।

साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण लें

  • फिशिंग (नकली ईमेल/लिंक) और सोशल इंजीनियरिंग (धोखे से जानकारी निकलवाना) जैसे तरीक़ों से साइबर अपराधी लोगों को फँसाते हैं।
     
  • अगर आप इन तकनीकों को पहचानना सीख जाएँगे, तो अपने और अपने साथियों को सुरक्षित रख पाएँगे।

सरकारी पहल और सहायता

भारत सरकार ने साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए कई पहल की हैं:

Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System: 

नागरिक साइबर धोखाधड़ी रिपोर्ट कर सकते हैं और तत्काल सहायता प्राप्त कर सकते हैं। टोल-फ्री नंबर 1930 उपलब्ध है।

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति: 

डिजिटल इंडिया पहल के तहत साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए साइबर अनुसंधान और विकास इकाइयाँ, और राष्ट्रीय समन्वय केंद्र (National Cyber Coordination Centre-NCCC) स्थापित किए गए हैं।

फौजियों, सतर्क रहें! 
अगर आपको भी कोई संदिग्ध कॉल, ईमेल या मैसेज मिलता है, तो तुरंत इसे रिपोर्ट करें। अपनी पेंशन और डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखें। आज ही अपने परिवार और साथी फौजियों के साथ इस गाइड को साझा करें और उन्हें साइबर धोखाधड़ी से बचाएँ!

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जय हिन्द!



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