SPARSH (System for Pension Administration Raksha) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक केंद्रीकृत डिजिटल पेंशन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य रक्षा पेंशन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध बनाना है। दशकों से चली आ रही बैंक-आधारित पेंशन प्रणाली मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भर थी, जिससे देरी, त्रुटियाँ और पेंशनरों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता था।
SPARSH से पहले पेंशन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएँ कागज़ों पर आधारित थीं।सेवानिवृत्त अधिकारी या सैनिक की फाइल रिकॉर्ड ऑफिस, CDA और बैंक जैसे कई विभागों में भौतिक रूप से घूमती थी। इससे न केवल समय लगता था बल्कि PPO में गलतियाँ होने की संभावना भी बढ़ जाती थी।
गलत PPO, बैंक द्वारा नियमों की गलत व्याख्या और शिकायतों के समाधान में देरी आम समस्याएँ थीं। कई बार पेंशनरों को सुधार के लिए खुद कार्यालय जाना पड़ता था।
SPARSH को “सही पेंशन, सही समय पर” के उद्देश्य से लागू किया गया। इसमें पेंशनर स्वयं अपनी जानकारी की जाँच कर सकते हैं, जिससे पहली बार में ही सही डेटा सुनिश्चित होता है। डिजिटल पहचान से बार-बार कार्यालय जाने की आवश्यकता समाप्त होती है और पेंशन प्रक्रिया तेज़ हो जाती है।
पहले बैंक PCDA(P) के निर्देशों के आधार पर पेंशन देते थे, जिससे गलत भुगतान होता था। अब SPARSH के तहत PCDA(P) इलाहाबाद सीधे पेंशन का भुगतान करता है, जिससे ऐसी त्रुटियाँ काफी कम हो जाती हैं।
सेवा मुख्यालयों को यह चिंता थी कि केंद्री कृत व्यवस्था में सेवा प्रदान करना मुश्किल हो सकता है। इस विषय को रक्षा मंत्रालय के सामने लगातार उठाया गया।
इसके समाधान के लिए CGDA ने बड़े बैंकों और Common Service Center (CSC) के साथ समझौते किए हैं ताकि देशभर में अंतिम स्तर तक सेवा पहुँच सके। SPARSH की तकनीकी व्यवस्था TCS द्वारा संचालित की जा रही है।
PCDA(P) इलाहाबाद, SPARSH प्रबंधन समिति के माध्यम से सेवा मुख्यालयों के साथ मिलकर शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करता है।
हाँ। रक्षा मंत्री और रक्षा सचिव के निर्देशों के अनुसार, जो पेंशनर पुरानी बैंक प्रणाली में रहना चाहते हैं, वे लिखित असहमति देकर ऐसा कर सकते हैं।
हालाँकि, पेंशनरों को SPARSH अपनाने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह अधिक पारदर्शिता, तेज़ सेवा और बेहतर शिकायत निवारण प्रदान करता है। भविष्य में पुरानी प्रणाली पर सेवा सीमित हो सकती है।
पेंशनरों को चरणबद्ध तरीके से SPARSH में शामिल किया गया। 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त कर्मियों को पहले, 2006 से 2015 के बीच सेवानिवृत्त कर्मियों को बाद में शामिल किया गया। दिसंबर 2022 तक सभी शेष पेंशनरों को SPARSH में शामिल किया जाना निर्धारित था।
SPARSH में शामिल करने से पहले PCDA(P) बैंक, रिकॉर्ड ऑफिस और पेंशन स्वीकृति प्राधिकरण के साथ डेटा मिलान करता है। कमसे कम 38 अनिवार्य जानकारियों की जाँच कीजाती है।
यदिमाइग्रेशन के बाद पेंशनरुक जाए या कमहो जाए, तो पेंशनर SPARSH सुविधा केंद्र, हेल्पलाइन, CSC या नौसेना के SMART सिस्टम से सहायता लेसकते हैं।
भारतीय नौसेना ने SPARSH Migration Assistance Response Team (SMART) की स्थापना की है। यह टीम विशेष रूप से नौसेना पेंशनरों की समस्याओं को सुलझाने के लिए बनाई गई है और हेल्पलाइन व ईमेल सहायता उपलब्ध कराती है।
सरकार इस बात को समझती है कि सभी पेंशनर डिजिटल रूप से सामने नहीं हैं। इसलिए CSC के माध्यम से जीवन प्रमाण, डेटा सुधार, शिकायत दर्ज करना और पारिवारिक पेंशन जैसी सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं।
पेंशनर की मृत्यु होने पर Next of Kin को SPARSH पोर्टल पर मृत्यु की सूचना देनी होती है। आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करने के बाद PCDA(P) द्वारा सत्यापन किया जाता है और स्वीकृति मिलने पर पारिवारिक पेंशन शुरू हो जाती है।
SPARSH पर जीवन प्रमाण मैनुअल, डिजिटल, Jeevan Pramaan या CSC/सेवा केंद्र के माध्यम से दिया जा सकता है।
SPARSH पूरी तरह OTP आधारित और सुरक्षित प्रणाली है। पेंशनर का खाता KYC पूर्ण बैंक खाते से जुड़ा होता है। किसी भी परिस्थिति में लॉगिन आई.डी, पासवर्ड या OTP किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
SPARSH रक्षा पेंशन व्यवस्था में एक बड़ा डिजिटल सुधार है। प्रारंभिक कठिनाइयों के बावजूद, यह प्रणाली पेंशनरों को लंबे समय में अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और सम्मान जनक सेवा प्रदान करेगी।
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जय हिंद!


