logo
search_icon

1999 Kargil War Series Part 6: जब 17वीं गढ़वाल राइफल्स, 8 जाट और 8 सिख ने दुश्मन को घुटनों पर ला दिया

7200 Views
icon

साल 1999। कारगिल की बर्फ़ से ढकी ऊँची चोटियाँ, माइनस तापमान और दुश्मन की गोलियों की लगातार बारिश। पाकिस्तान ने चुपके से भारतीय चौकियों पर कब्ज़ा कर लिया था, लेकिन उसे शायद अंदाज़ा नहीं था कि भारतीय सेना के जवान असंभव को भी संभव बना देंगे।

ऑपरेशन विजय के दौरान भारतीय सेना की कई बटालियनों ने इतिहास रचा, लेकिन 17वीं गढ़वाल राइफल्स, 8 जाट और 8 सिख की वीरता आज भी कारगिल युद्ध की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में गिनी जाती है।

द्रास, बटालिक, मश्कोह घाटी और टाइगर हिल की खतरनाक चोटियों पर इन सैनिकों ने वह कर दिखाया, जिसे दुनिया की सबसे कठिन सैन्य कार्रवाइयों में गिना जाता है।

कारगिल युद्ध 1999: कैसे शुरू हुआ था ऑपरेशन विजय?

भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर को लेकर विवाद 1947 से चला आ रहा था। फरवरी 1999 में दोनों देशों के बीच लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर हुए, लेकिन इसी दौरान पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों ने कारगिल, द्रास और बटालिक की कई ऊँची भारतीय चौकियों पर कब्ज़ा कर लिया।

3 मई 1999 को पहली बार घुसपैठ का पता चला। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने 26 मई को हवाई अभियान शुरू किया और भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत दुश्मन को खदेड़ने की कार्रवाई तेज कर दी।

करीब दो महीने तक चली भीषण लड़ाई के बाद 26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में ऐतिहासिक जीत हासिल की।

17वीं गढ़वाल राइफल्स: बटालिक की बर्फीली चोटियों पर पराक्रम

गढ़वाल राइफल्स भारतीय सेना की सबसे प्रतिष्ठित इन्फैंट्री रेजिमेंटों में से एक है। इसकी स्थापना 1887 में हुई थी और इसका रेजिमेंटल सेंटर उत्तराखंड के लैंसडाउन में स्थित है।

कारगिल युद्ध में 17वीं गढ़वाल राइफल्स को बटालिक सेक्टर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

पॉइंट 5285 की लड़ाई

जुलाई 1999 में 17वीं गढ़वाल राइफल्स के जवानों को पॉइंट 5285 पर कब्ज़ा करने का आदेश मिला। बर्फीले तूफानों, ऑक्सीजन की कमी और लगभग सीधी चट्टानों के बावजूद जवान लगातार आगे बढ़ते रहे।

13 जुलाई 1999 तक भारतीय सेना ने इस महत्वपूर्ण चोटी पर फिर से तिरंगा फहरा दिया। इस जीत ने जुबर और कुकरथांग रिज लाइन पर भारत की स्थिति को और मजबूत किया।

कैप्टन जिंटू गोगोई: जुबर हिल के हीरो

17वीं गढ़वाल राइफल्स के अधिकारी कैप्टन जिंटू गोगोई का नाम कारगिल युद्ध के सबसे बहादुर सैनिकों में लिया जाता है।

असम के गोलाघाट जिले में जन्मे कैप्टन गोगोई ने 29–30 जून 1999 की रात जुबर हिल पर अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया। दुश्मन की लगातार गोलीबारी के बीच उन्होंने अपने सैनिकों का मनोबल बनाए रखा।

लड़ाई के दौरान वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके असाधारण साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

आज भी उन्हें "हीरो ऑफ जुबर हिल" के नाम से याद किया जाता है।

8 जाट: 17,000 फीट की ऊँचाई पर दुश्मन के खिलाफ निर्णायक लड़ाई

भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंटों में से एक जाट रेजिमेंट की शुरुआत 1795 में हुई थी। इसका युद्धघोष है—

“जाट बलवान, जय भगवान”

कारगिल युद्ध के दौरान 8 जाट को मश्कोह घाटी और नियंत्रण रेखा के पास की ऊँची चौकियों पर नज़र रखने की जिम्मेदारी दी गई थी।

हवलदार सिस राम गिल: घायल होने के बाद भी नहीं छोड़ा मोर्चा

राजस्थान के झुंझुनू जिले के विशनपुरा गाँव में जन्मे हवलदार सिस राम गिल 8 जाट बटालियन के सबसे बहादुर सैनिकों में से एक थे।

8 जुलाई 1999 की रात उनकी टीम को 17,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक महत्वपूर्ण पोस्ट पर कब्ज़ा करने का आदेश मिला।

हमले के दौरान हवलदार गिल गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया। उन्होंने दुश्मन के कई सैनिकों को मार गिराया और अपने साथियों को आगे बढ़ने का मौका दिया।

अपनी अंतिम सांस तक लड़ते रहने वाले हवलदार सिस राम गिल को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

वे अपने पीछे पत्नी संतरा देवी, दो बेटे, विजय सिंह और कैलाश सिंह, और बेटी डिंपल को छोड़ गए।

8 सिख: जब टाइगर हिल पर गूँजा “बोले सो निहाल”

भारतीय सेना की सबसे सम्मानित इन्फैंट्री रेजिमेंटों में से एक सिख रेजिमेंट की स्थापना 1846 में हुई थी।

इसका आदर्श वाक्य है—

“निश्चय कर अपनी जीत करों”

और युद्धघोष—

“बोले सो निहाल, सत श्री अकाल”

कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल पर कब्ज़ा भारतीय सेना के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक जीतों में से एक था।

जुलाई 1999 में 8 सिख की एक विशेष टुकड़ी को टाइगर हिल पर सीधा हमला करने का आदेश मिला। भारी बारिश, दुश्मन की मशीनगनों और लगातार हो रही गोलाबारी के बीच जवान खड़ी चट्टानों पर चढ़ते रहे।

इस टुकड़ी में केवल 52 सैनिक थे, लेकिन उनका हौसला दुश्मन से कहीं बड़ा था।

सूबेदार निर्मल सिंह और सिपाही सतपाल सिंह की वीरता

लड़ाई के दौरान सूबेदार निर्मल सिंह ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपनी पोस्ट नहीं छोड़ी और लगातार ब्रिगेड मुख्यालय से संपर्क बनाए रखा।

वहीं, सिपाही सतपाल सिंह ने आमने-सामने की लड़ाई में एक पाकिस्तानी अधिकारी सहित कई दुश्मन सैनिकों को मार गिराया।

पाकिस्तान की लगातार जवाबी कार्रवाई के बावजूद 8 सिख के जवान अपनी जगह डटे रहे। इस संघर्ष में 14 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन उनकी बहादुरी ने टाइगर हिल पर भारत की जीत की नींव रख दी।

सिपाही सतपाल सिंह को उनकी वीरता के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

कारगिल विजय दिवस: वीरों की कहानियाँ जो हमेशा ज़िंदा रहेंगी

कारगिल युद्ध सिर्फ़ पहाड़ों पर लड़ी गई एक लड़ाई नहीं थी। यह उन सैनिकों की कहानी है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की।

17वीं गढ़वाल राइफल्स, 8 जाट और 8 सिख के बहादुर जवानों ने साबित कर दिया कि भारतीय सेना का साहस किसी भी चुनौती से बड़ा है।

यदि आपने हमारी Kargil War Series के Part 1, Part 2, Part 3, Part 4 और Part 5 अभी तक नहीं पढ़े हैं, तो उन्हें भी अवश्य पढ़ें। कारगिल विजय की पूरी कहानी इन्हीं वीरों के साहस और बलिदान से मिलकर बनती है।

FaujiBeats के साथ जुड़े रहिए।

जय हिन्द!

FAQs

Q. कारगिल युद्ध में 17वीं गढ़वाल राइफल्स ने कौन-सा ऑपरेशन किया था?

17वीं गढ़वाल राइफल्स ने बटालिक सेक्टर में पॉइंट 5285 और जुबर रिज क्षेत्र में महत्वपूर्ण अभियानों में हिस्सा लिया था।

Q. हवलदार सिस राम गिल कौन थे?

हवलदार सिस राम गिल 8 जाट बटालियन के सैनिक थे, जिन्हें कारगिल युद्ध में वीरता के लिए मरणोपरांत वीर चक्र दिया गया था।

Q. टाइगर हिल पर कब्ज़ा किस बटालियन ने किया था?

टाइगर हिल ऑपरेशन में कई यूनिटों ने भाग लिया था, जिनमें 8 सिख ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

Q. कैप्टन जिंटू गोगोई को कौन-सा वीरता पुरस्कार मिला था?

कैप्टन जिंटू गोगोई को कारगिल युद्ध में उनके बलिदान और नेतृत्व के लिए मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।



Disclaimer : Faujibeats एक public information platform है, फौजी परिवार से अनुरोध है कि यहाँ दी गई जानकारी को सिर्फ़ संदर्भ (reference) के रूप में उपयोग करें और जानकारी की पुष्टि करने के लिए सरकार की वेबसाइट को refer करें। Fauji Beats पर जो image उपयोग किए गए हैं, वे असली चित्र नहीं हैं और केवल demonstration के लिए ली गए हैं। आपकी राय और सुधार के लिए हम हमेशा तयार हैं। यदी आपको कुछ भी सुधारने योग्य लगे, तो कृपया alert@faujibeats.com पर लिखें। जय हिंद!

Related Articles

Motivational
Battle of Dograi 1965: जब 3 JAT ने लड़ी Dograi की ऐतिहासिक लड़ाई
7500
4.5
Motivational
Captain Vikram Batra, PVC: Kargil War, Point 4875 और सर्वोच्च बलिदान की कहानी
7609
4.5
Motivational
कारगिल विजय दिवस 2026: 27 साल बाद भी अमर है शौर्य और बलिदान की कहानी
7200
4.5
Disclaimer : Faujibeats एक public information platform है, फौजी परिवार से अनुरोध है कि यहाँ दी गई जानकारी को सिर्फ़ संदर्भ (reference) के रूप में उपयोग करें और जानकारी की पुष्टि करने के लिए सरकार की वेबसाइट को refer करें। Fauji Beats पर जो image उपयोग किए गए हैं, वे असली चित्र नहीं हैं और केवल demonstration के लिए ली गए हैं। आपकी राय और सुधार के लिए हम हमेशा तयार हैं। यदी आपको कुछ भी सुधारने योग्य लगे, तो कृपया alert@faujibeats.com पर लिखें। जय हिंद!